जगदीश ईश्वरभाई पटेल होंगे सह-प्रभारी; चुनावी राज्य उत्तर प्रदेश में संगठन और रणनीति को मजबूत करने पर पार्टी का फोकस

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया है। वहीं जगदीश ईश्वरभाई पटेल को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
बीजेपी का यह फैसला ऐसे समय आया है जब पार्टी ने 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर संगठन को चुनावी मोड में लाना शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश के साथ पंजाब और गुजरात के लिए भी नए प्रभारियों की नियुक्ति की गई है।
यूपी में संगठन को चुनावी रणनीति के अनुरूप मजबूत करने की तैयारी
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा विधानसभा चुनावी मैदान है, जहां कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। ऐसे में पार्टी के लिए बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय रखना और अलग-अलग क्षेत्रों में राजनीतिक समीकरणों पर लगातार काम करना अहम माना जा रहा है।
विनोद तावड़े को यूपी की जिम्मेदारी दिए जाने को इसी व्यापक चुनावी तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। तावड़े के पास पार्टी संगठन में लंबे समय तक काम करने का अनुभव है और वह पहले भी चुनावी जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
जगदीश पटेल संभालेंगे सह-प्रभारी की भूमिका
विनोद तावड़े के साथ जगदीश ईश्वरभाई पटेल को सह-प्रभारी बनाया गया है। दोनों नेताओं की जिम्मेदारी राज्य संगठन के साथ समन्वय करने और पार्टी की चुनावी तैयारियों को गति देने की होगी।
बीजेपी नेतृत्व की ओर से हालिया गतिविधियों में यूपी के सांसदों के साथ बैठकें और जमीनी राजनीतिक स्थिति का फीडबैक लेने पर भी जोर दिया गया है। पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन ने यूपी के सांसदों से मुलाकात कर जातीय समीकरणों और कार्यकर्ताओं के मनोबल सहित कई मुद्दों पर चर्चा की थी।
राष्ट्रीय संगठन में बदलाव के बाद राज्यों पर फोकस
बीजेपी ने हाल ही में राष्ट्रीय संगठन में भी बदलाव किया है। इसके बाद चुनावी राज्यों के लिए नए प्रभारियों की नियुक्ति को पार्टी के संगठनात्मक पुनर्गठन के अगले चरण के तौर पर देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश के अलावा सतीश पूनिया को पंजाब और तरुण चुघ को गुजरात का प्रभारी बनाया गया है।
2027 के लिए अब तेज होगी चुनावी गतिविधियां
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 में प्रस्तावित हैं। नए प्रभारी और सह-प्रभारी की नियुक्ति के बाद पार्टी के सामने अब संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने, कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बढ़ाने और अलग-अलग क्षेत्रों के राजनीतिक फीडबैक को चुनावी रणनीति में शामिल करने की चुनौती होगी।
बीजेपी के इस कदम से साफ संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी ने यूपी चुनाव की तैयारियों को लेकर संगठनात्मक स्तर पर काम तेज कर दिया है। हालांकि, नई टीम की वास्तविक चुनावी रणनीति आने वाले महीनों में होने वाली बैठकों और कार्यक्रमों के जरिए अधिक स्पष्ट होगी।
Also Read: अयोध्या चढ़ावा मामले में SIT की अंतिम रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंपी गई, अब आगे की कार्रवाई पर नजर


















