रिलायंस इंडस्ट्रीज के ग्रुप प्रेसिडेंट से गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष तक, राजनीतिक रूप से सक्रिय परिवार से आते हैं धनराज; अखिलेश यादव ने बनाया यूपी से राज्यसभा उम्मीदवार

लखनऊ: समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश की आगामी राज्यसभा सीटों के लिए जब वरिष्ठ नेता प्रो. रामगोपाल यादव के साथ धनराज परिमल नाथवानी का नाम घोषित किया, तो नाथवानी का नाम राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा में आ गया। 30 सितंबर को दोनों नेताओं ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन भी दाखिल कर दिया।
रामगोपाल यादव का नाम पार्टी के भीतर लंबे राजनीतिक अनुभव के कारण अपेक्षित माना जा रहा था, जबकि नाथवानी का चयन अपेक्षाकृत अप्रत्याशित रहा। रिपोर्टों के मुताबिक, पार्टी के भीतर भी उनका नाम कई लोगों के लिए चौंकाने वाला था।
कौन हैं धनराज परिमल नाथवानी?
धनराज परिमल नाथवानी का मुख्य पेशेवर परिचय कॉरपोरेट क्षेत्र से जुड़ा है। वह रिलायंस इंडस्ट्रीज में ग्रुप प्रेसिडेंट हैं और रिलायंस समूह की कुछ प्रमुख कंपनियों से जुड़े रहे हैं। उपलब्ध प्रोफाइलों के अनुसार, उनका काम गुजरात में रिलायंस के विभिन्न कारोबारी और संस्थागत मामलों से भी जुड़ा रहा है।
नाथवानी की सार्वजनिक प्रोफाइल में कॉरपोरेट प्रशासन के साथ-साथ सामाजिक, सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों से जुड़ी भूमिकाएं भी शामिल हैं।
गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष
धनराज नाथवानी गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (GCA) के अध्यक्ष हैं। नवंबर 2022 में उन्हें इस पद पर निर्विरोध चुना गया था। इससे पहले वह GCA में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
उनकी खेल प्रशासन से जुड़ी भूमिका ने उन्हें गुजरात के सार्वजनिक जीवन में भी पहचान दिलाई है। वह गुजरात स्टेट फुटबॉल एसोसिएशन से भी जुड़े रहे हैं।
पिता परिमल नाथवानी भी राज्यसभा सांसद
धनराज नाथवानी का राजनीतिक संदर्भ उनके पारिवारिक संबंधों से भी जुड़ा है। उनके पिता परिमल नाथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े वरिष्ठ कॉरपोरेट अधिकारी और राज्यसभा सांसद हैं। जून 2026 में वह झारखंड से चौथी बार राज्यसभा के लिए चुने गए। इससे पहले वह झारखंड से निर्दलीय और आंध्र प्रदेश से YSR कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा में रह चुके हैं।
भारतीय एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, परिमल नाथवानी रिलायंस के संस्थापक धीरूभाई अंबानी और बाद में मुकेश अंबानी के साथ लंबे समय से जुड़े रहे हैं। उनके बेटे धनराज भी रिलायंस में वरिष्ठ पद पर हैं।
गुजरात के राजनीतिक और संस्थागत हलकों से जुड़ाव
धनराज नाथवानी की सार्वजनिक भूमिका केवल कॉरपोरेट क्षेत्र तक सीमित नहीं रही है। गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन में उनकी जिम्मेदारी के दौरान राज्य के प्रमुख राजनीतिक और प्रशासनिक चेहरों के साथ उनका संस्थागत संपर्क रहा है।
हालांकि, इन संपर्कों को किसी राजनीतिक दल के साथ उनकी औपचारिक संबद्धता के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा। उपलब्ध रिपोर्टों में उनकी पहचान मुख्य रूप से कॉरपोरेट कार्यकारी और खेल प्रशासक के तौर पर की गई है।
फिर सपा ने नाथवानी को क्यों चुना?
यही इस नामांकन का सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल है। सपा ने अभी तक सार्वजनिक तौर पर यह विस्तृत कारण नहीं बताया है कि धनराज नाथवानी को उम्मीदवार बनाने के पीछे उसकी विशिष्ट रणनीति क्या है।
अखिलेश यादव ने पहले संकेत दिया था कि राज्यसभा उम्मीदवारों में एक नाम ‘सरप्राइज’ हो सकता है। इसके बाद धनराज नाथवानी के नाम की घोषणा हुई।
नाथवानी का प्रोफाइल पारंपरिक पार्टी राजनीति से अलग है। उनका अनुभव कॉरपोरेट प्रबंधन, रिलायंस समूह, खेल प्रशासन और संस्थागत गतिविधियों से जुड़ा रहा है। यही वजह है कि उनका चयन सपा की सामान्य राजनीतिक नियुक्तियों से अलग दिखाई देता है।
हालांकि, यह कहना कि सपा ने उन्हें किसी खास कारोबारी या राजनीतिक संबंध के कारण ही चुना है, उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर पुष्ट नहीं किया जा सकता। इसलिए चयन के कारणों को लेकर फिलहाल केवल राजनीतिक चर्चाएं और विश्लेषण उपलब्ध हैं।
यूपी से गुजरात के कारोबारी चेहरे को टिकट
धनराज नाथवानी का राजनीतिक आधार गुजरात से जुड़ा रहा है, जबकि सपा ने उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। यही पहलू उनके नामांकन को और महत्वपूर्ण बनाता है।
भारतीय एक्सप्रेस ने भी उनके चयन को सपा की ओर से एक अप्रत्याशित कदम बताया है और इस बात को रेखांकित किया है कि गुजरात में कॉरपोरेट और सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्ति को यूपी से राज्यसभा उम्मीदवार बनाया गया है।
सपा की राज्यसभा रणनीति में नाथवानी की भूमिका
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है। मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर सपा और उसके सहयोगियों के लिए दो सीटों तक पहुंचने की स्थिति बताई जा रही है।
सपा ने फिलहाल रामगोपाल यादव और धनराज नाथवानी को उम्मीदवार घोषित किया है। तीसरे उम्मीदवार को लेकर पार्टी की ओर से अभी अंतिम घोषणा नहीं हुई है।
रामगोपाल यादव जहां सपा के लंबे समय से सक्रिय संसदीय चेहरा हैं, वहीं नाथवानी का प्रोफाइल कॉरपोरेट और खेल प्रशासन से आता है। इस लिहाज से दोनों नाम पार्टी की राज्यसभा रणनीति के दो अलग-अलग पहलुओं को सामने रखते हैं।
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नामांकन के बाद क्या?
धनराज नाथवानी ने 30 सितंबर को रामगोपाल यादव के साथ अपना नामांकन दाखिल कर दिया। दोनों के नामांकन के दौरान अखिलेश यादव मौजूद रहे।
अब नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया के बाद चुनावी तस्वीर और स्पष्ट होगी। उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान 16 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है।
धनराज नाथवानी का राज्यसभा उम्मीदवार बनना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उनकी पहचान अब तक मुख्य रूप से रिलायंस के वरिष्ठ अधिकारी, गुजरात क्रिकेट प्रशासक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्ति के रूप में रही है। सपा ने उन्हें उत्तर प्रदेश से संसद के उच्च सदन में भेजने का फैसला किया है, लेकिन उनके चयन के पीछे पार्टी की विस्तृत रणनीति अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।




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