RTE के तहत निजी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों की फीस और शैक्षिक जरूरतों के लिए बजट आवंटित। अभिभावकों के खाते में किताबों व स्टेशनरी के लिए 5,000 रुपये DBT से भेजे जाएंगे।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की निजी स्कूलों में पढ़ाई जारी रखने के लिए योगी सरकार ने 698.27 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत इस राशि से 6.93 लाख बच्चों की फीस की प्रतिपूर्ति और किताबों व स्टेशनरी के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी। सरकार ने आगामी शैक्षिक सत्र 2027-28 में नए प्रवेशों को ध्यान में रखते हुए भी बजट का प्रावधान किया है।
6.93 लाख बच्चों की पढ़ाई के लिए बजट
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, शैक्षिक सत्र 2025-26 तक RTE के तहत 5.36 लाख बच्चे योजना से जुड़े थे। सत्र 2026-27 में 1.57 लाख नए प्रवेश होने के बाद लाभार्थी बच्चों की कुल संख्या बढ़कर करीब 6.93 लाख हो गई है। इन बच्चों की शिक्षा से संबंधित खर्चों के लिए कुल 698.27 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
फीस के लिए 362 करोड़, किताबों के लिए 335 करोड़
आवंटित राशि को दो प्रमुख मदों में रखा गया है।
- 362.56 करोड़ रुपये: निजी स्कूलों को शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए।
- 335.70 करोड़ रुपये: बच्चों की किताबों, स्टेशनरी और अन्य शैक्षिक जरूरतों के लिए वित्तीय सहायता।
RTE के तहत निजी स्कूलों को प्रति विद्यार्थी करीब 450 रुपये प्रतिमाह शुल्क प्रतिपूर्ति दी जाती है। इसके अलावा, प्रत्येक पात्र बच्चे के अभिभावक के आधार से जुड़े बैंक खाते में 5,000 रुपये की एकमुश्त सहायता प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से भेजी जाएगी।
अधिकारियों को दिए गए निर्देश
बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि RTE के तहत प्रवेश पाने वाले बच्चों की पढ़ाई में किसी तरह की बाधा नहीं आनी चाहिए। निजी स्कूलों को शुल्क प्रतिपूर्ति समय पर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है, ताकि भुगतान में देरी के कारण बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो।
अगले सत्र के लिए भी 85 करोड़ रुपये
सरकार ने शैक्षिक सत्र 2027-28 में करीब 1.70 लाख नए प्रवेश होने का अनुमान लगाया है। इसके लिए 85 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य पात्र बच्चों को निजी स्कूलों में शिक्षा का अवसर उपलब्ध कराना और उनकी पढ़ाई बीच में रुकने से रोकना है।
RTE योजना के तहत पात्र बच्चों को निजी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश और प्रारंभिक शिक्षा का अवसर मिलता है। अब आवंटित धनराशि का समय पर उपयोग और लाभार्थियों तक सहायता पहुंचना अहम होगा।
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