यूपीसीडा की पहल के तहत आधुनिक औद्योगिक सुविधाओं पर जोर। प्रस्तावित क्षेत्रों में चौड़ी सड़कें, भूमिगत बिजली व्यवस्था, जलशोधन संयंत्र, गोदाम और श्रमिकों के लिए आवास जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना।

उत्तर प्रदेश में उद्योगों को बढ़ावा देने और निवेश के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा तैयार करने की दिशा में बाराबंकी और हरदोई में औद्योगिक क्षेत्रों को आधुनिक सुविधाओं से विकसित करने की पहल की गई है। प्रस्ताव के अनुसार, बाराबंकी के सनौली में 232 एकड़ और हरदोई के संडीला में 350 एकड़ क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं से लैस करने की योजना है।
इन औद्योगिक क्षेत्रों को भारत औद्योगिक विकास योजना (भाव्या) के मॉडल पर विकसित करने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों से लेकर बड़े विनिर्माण उद्योगों तक को ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जिससे इकाइयां स्थापित करने और उत्पादन शुरू करने में आने वाली बुनियादी अड़चनें कम हों।
किन सुविधाओं से लैस होंगे औद्योगिक क्षेत्र?
प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्रों में केवल फैक्ट्रियों के लिए भूखंड ही नहीं, बल्कि उद्योगों के संचालन और कर्मचारियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर साझा सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
- आधुनिक सड़कें: उद्योगों और मालवाहक वाहनों की आवाजाही के लिए चौड़ी सड़कें।
- भूमिगत बिजली व्यवस्था: बिजली आपूर्ति और अन्य यूटिलिटी सेवाओं के लिए आधुनिक नेटवर्क।
- पानी और सीवरेज: नियमित जलापूर्ति, सीवरेज नेटवर्क और जलशोधन संयंत्र।
- भंडारण और लॉजिस्टिक्स: माल रखने के लिए गोदाम और अन्य साझा सुविधाएं।
- बैंक, अस्पताल और स्कूल: उद्यमियों, कर्मचारियों और उनके परिवारों की जरूरतों के लिए जरूरी सेवाएं।
- आवासीय व्यवस्था: श्रमिकों और उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए आवास की सुविधा।
छोटे उद्योगों से बड़े निवेशकों तक को फायदा
इस मॉडल में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के साथ बड़े उद्योगों के लिए भी जगह बनाने की योजना है। साझा बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होने से कंपनियों को बिजली, पानी, सड़क और अपशिष्ट प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं पर अलग से शुरुआती निवेश करने का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है।
केंद्र की भाव्या योजना का व्यापक उद्देश्य देशभर में निवेश के लिए तैयार औद्योगिक पार्क विकसित करना है। इसके तहत ₹33,660 करोड़ के कुल प्रावधान के साथ छह वर्षों में 100 औद्योगिक पार्क विकसित करने की योजना बनाई गई है। हालांकि, बाराबंकी और संडीला की परियोजनाओं की अंतिम स्वीकृति और भाव्या योजना के तहत चयन की स्थिति की पुष्टि अलग से जरूरी है।
रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर नजर
यदि प्रस्तावित सुविधाएं विकसित होती हैं और उद्योग स्थापित होते हैं, तो आसपास के क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। परिवहन, भंडारण, निर्माण, मरम्मत, खानपान और अन्य सहायक सेवाओं से जुड़े कारोबार को भी फायदा मिलने की संभावना है।
फिलहाल परियोजना की समयसीमा, निवेश की कुल राशि, भूखंड आवंटन और रोजगार के अनुमानित आंकड़े उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं हैं। इनका पता संबंधित विभाग की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और आधिकारिक घोषणाओं से ही चलेगा।
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