भारतीय युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए कथित तौर पर जोड़ने के आरोपों की जांच; विदेशी हैंडलरों, फंडिंग और डिजिटल संपर्कों की पड़ताल करेगी एजेंसी

लखनऊ: पाकिस्तान स्थित शहजाद भट्टी नेटवर्क से जुड़े कथित भर्ती और कट्टरपंथीकरण के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अपनी लखनऊ इकाई में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की है। एजेंसी की जांच का केंद्र विदेशी हैंडलरों की भूमिका, नेटवर्क को मिलने वाली आर्थिक मदद और सोशल मीडिया के जरिए भारतीय युवाओं तक पहुंचने का कथित तरीका होगा। NIA की वेबसाइट पर दर्ज मामले के विवरण में विदेशी देश के गैंगस्टरों द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से भारतीय युवाओं को कट्टरपंथ की ओर ले जाने से जुड़ी सूचना का उल्लेख है।
यूपी ATS की जांच के बाद NIA की एंट्री
मामले की पृष्ठभूमि में उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) की कार्रवाई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ATS ने अप्रैल 2026 में नोएडा से तुषार चौहान और समीर खान को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि दोनों सोशल मीडिया के जरिए शहजाद भट्टी और उसके सहयोगी आबिद जट के संपर्क में आए थे। आरोपों के मुताबिक, विदेशी हैंडलरों ने उन्हें कथित तौर पर हिंसक गतिविधियों और नेटवर्क के प्रचार से जुड़े काम सौंपे थे। इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।
विदेशी हैंडलरों और आर्थिक मदद की जांच
NIA यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि कथित नेटवर्क का संचालन किन लोगों के जरिए किया जा रहा था और भारत में मौजूद युवाओं से उनका संपर्क कैसे स्थापित होता था। जांच में आर्थिक लेन-देन, मदद के स्रोत और कथित गतिविधियों के लिए धन उपलब्ध कराने वालों की भूमिका भी शामिल होगी। एजेंसी यह भी जांचेगी कि नेटवर्क से जुड़े लोगों को किसी तरह का भुगतान या अन्य प्रलोभन दिया गया था या नहीं।
सोशल मीडिया और डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल
जांच का एक अहम हिस्सा सोशल मीडिया अकाउंट, संदेशों, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच होगा। एजेंसी कथित विदेशी संपर्कों और भारतीय युवाओं के बीच संवाद की प्रकृति, नेटवर्क के विस्तार और संभावित स्थानीय संपर्कों की पहचान करने का प्रयास करेगी। यह भी जांच के दायरे में होगा कि ऑनलाइन संपर्क के बाद युवाओं को किस तरह के काम सौंपे जाने का आरोप है।
आरोपों की पुष्टि जांच के बाद
मामले में सामने आए आरोप गंभीर हैं, लेकिन एफआईआर दर्ज होना अपने आप में आरोपों का साबित होना नहीं है। जांच एजेंसियों को कथित संपर्कों, आर्थिक लेन-देन और गतिविधियों से जुड़े साक्ष्यों की पुष्टि करनी होगी। संबंधित आरोपियों का पक्ष और अदालत में आगे की कार्यवाही भी मामले के निष्कर्ष के लिए महत्वपूर्ण होगी।
NIA की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कथित नेटवर्क का संचालन कैसे किया जा रहा था, विदेशी हैंडलरों की भूमिका क्या थी और सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को जोड़ने के आरोपों के पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे। फिलहाल एजेंसी की जांच जारी है।
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