शादी का झूठा वादा कर यौन संबंध बनाने के आरोप में दर्ज FIR को क्रिकेटर ने चुनौती दी है; कोर्ट ने जांच में सहयोग करने को कहा।

लखनऊ में दर्ज FIR को चुनौती देने वाले रणजी क्रिकेटर मोहम्मद कैफ को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ से अंतरिम राहत मिली है। अदालत ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक उन्हें इस मामले में गिरफ्तार न किया जाए। साथ ही कैफ को जांच में सहयोग करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर को होनी है। यह राहत अस्थायी है; अदालत ने अभी FIR रद्द करने या आरोपों के गुण-दोष पर अंतिम फैसला नहीं दिया है।
मोहम्मद कैफ भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी के भाई हैं और रणजी क्रिकेट से जुड़े रहे हैं। उनके खिलाफ 13 सितंबर 2026 को लखनऊ के आशियाना थाने में FIR दर्ज की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उन्होंने शादी का भरोसा देकर महिला के साथ यौन संबंध बनाए और बाद में शादी से पीछे हट गए। FIR में भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 और 351(3) के तहत आरोप दर्ज किए गए हैं। आरोपों की जांच जारी है और इन्हें अदालत में अभी साबित नहीं किया गया है।
FIR को रद्द कराने के लिए याचिका
कैफ ने FIR को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में आपराधिक रिट याचिका दाखिल की थी। उनकी ओर से पेश वकील ने अदालत में दलील दी कि शिकायत गलत और मनगढ़ंत कहानी पर आधारित है तथा कैफ ने कभी शादी का वादा नहीं किया। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि शिकायत का उद्देश्य उन्हें बदनाम करना है। ये याचिकाकर्ता की ओर से रखी गई दलीलें हैं, अदालत का अंतिम निष्कर्ष नहीं।
शिकायतकर्ता की ओर से याचिका का विरोध किया गया। उनके वकील ने कहा कि FIR में दर्ज तथ्यों से प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का मामला बनता है। अदालत के सामने दोनों पक्षों की दलीलें रखी गईं, लेकिन इस चरण पर FIR को रद्द करने की मांग पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ।
जांच और FIR को दिल्ली स्थानांतरित करने का मुद्दा
सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि शिकायतकर्ता के अलग-अलग बयानों में कुछ विरोधाभास हैं। राज्य ने यह भी कहा कि जांच अधिकारी ने मामले को दिल्ली स्थानांतरित करने की सिफारिश उच्च अधिकारियों को भेजी है, क्योंकि मुख्य आरोप दिल्ली से जुड़े बताए गए हैं। यह सिफारिश अभी निर्णय के लिए लंबित बताई गई।
कैफ के वकील ने अदालत को बताया कि स्थानांतरण की सिफारिश पर अब तक कोई फैसला नहीं हुआ है और याचिकाकर्ता को गिरफ्तारी की आशंका है। राज्य के वकील ने इस संबंध में जानकारी लेकर अदालत को अवगत कराने के लिए समय मांगा। इसी पृष्ठभूमि में पीठ ने अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिया, लेकिन जांच में सहयोग की शर्त रखी।
4 नवंबर को अगली सुनवाई
न्यायमूर्ति रजनीश कुमार और न्यायमूर्ति जफीर अहमद की खंडपीठ ने 24 अक्टूबर को अंतरिम आदेश पारित किया था। मामले को 4 नवंबर को फिर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। अगली तारीख पर अदालत के सामने जांच की स्थिति और FIR को दिल्ली स्थानांतरित करने की सिफारिश पर हुई प्रगति रखे जाने की संभावना है।
फिलहाल अदालत का आदेश केवल गिरफ्तारी से अस्थायी संरक्षण तक सीमित है। कैफ को जांच में सहयोग करना होगा और FIR को चुनौती देने वाली याचिका पर आगे की सुनवाई बाकी है। शिकायत में लगाए गए आरोपों और कैफ की ओर से पेश बचाव—दोनों का अंतिम निर्धारण कानूनी प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।
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