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गोरखपुर में बनेगा भव्य गोरखा संग्रहालय, आमजन के लिए होगा पहली बार खुला – अयोध्या और वाराणसी के संग्रहालयों से ली जाएगी प्रेरणा

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    संवाददाता
  • 2 दिन पहले
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संवाददाता | अप्रैल 4, 2025


गोरखपुर: पूर्वांचल को जल्द ही एक और ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान मिलने जा रही है। गोरखपुर में गोरखा रेजिमेंट का एक भव्य संग्रहालय बनाया जाएगा, जो पहली बार आम जनता के लिए भी खुला रहेगा। यह संग्रहालय देश की सैन्य परंपरा, विशेषकर गोरखा रेजिमेंट के शौर्य, इतिहास और योगदान को प्रदर्शित करेगा।

 
गोरखा रेजिमेंट
 

45 करोड़ रुपये की परियोजना को शासन की मंजूरी मिल चुकी है और पहली किश्त के रूप में 15 करोड़ रुपये जारी भी किए जा चुके हैं। संस्कृति विभाग ने निर्माण की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ाए हैं और फिलहाल डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है।


प्रेरणा लेंगे अयोध्या और वाराणसी के संग्रहालयों से

संग्रहालय के स्वरूप को बेहतर बनाने के लिए संस्कृति विभाग की टीम अयोध्या स्थित डोगरा रेजिमेंट संग्रहालय और वाराणसी के गोरखा ट्रेनिंग सेंटर संग्रहालय का दौरा करेगी। इसके साथ ही लखनऊ स्थित गोरखा रेजिमेंट संग्रहालय को भी देखा जाएगा ताकि डिजाइन और सामग्री के चुनाव में व्यापकता लाई जा सके।


लाइट एंड साउंड शो बनेगा आकर्षण का केंद्र

प्रस्तावित संग्रहालय में लाइट एंड साउंड शो का भी आयोजन किया जाएगा, जिससे दर्शक न केवल शौर्य गाथाओं को पढ़ेंगे, बल्कि उन्हें जीवंत रूप में अनुभव भी कर सकेंगे। संग्रहालय परिसर में पहले से मौजूद गोरखा स्मारक को भी नये सिरे से आकर्षक रूप दिया जाएगा।


पहली बार आम लोगों को मिलेगा प्रवेश

संस्कृति विभाग के अनुसार, गोरखा रेजिमेंट की सात शाखाओं में पहले से संग्रहालय मौजूद हैं, लेकिन वे सिर्फ सेना के अधिकारियों और सैनिकों के लिए ही खुलते हैं। गोरखपुर में बनने वाला संग्रहालय देश का पहला ऐसा संग्रहालय होगा जो आम नागरिकों के लिए भी खुला रहेगा, जिससे युवाओं और इतिहासप्रेमियों को गोरखा रेजिमेंट के वीरता से जुड़ने का अवसर मिलेगा।


रेजिमेंट की पहल, मुख्यमंत्री का समर्थन

इस संग्रहालय के निर्माण की पहल रेजिमेंट के अधिकारियों द्वारा की गई थी, जिन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया। मुख्यमंत्री के समर्थन और शासन की स्वीकृति के बाद अब यह सपना साकार होने की ओर है।


गोरखपुर का यह संग्रहालय न केवल सेना के इतिहास को संजोएगा, बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में भी एक नई पहचान बनाएगा।

 


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