top of page

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: ‘रेप साबित करने के लिए शारीरिक चोट जरूरी नहीं’

  • लेखक की तस्वीर: ब्यूरो
    ब्यूरो
  • 11 मार्च
  • 2 मिनट पठन

ब्यूरो | मार्च 11, 2025


नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने 40 साल पुराने दुष्कर्म मामले की सुनवाई के दौरान अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि पीड़िता के प्राइवेट पार्ट पर चोट के निशान न होने का मतलब यह नहीं कि दुष्कर्म साबित नहीं हो सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अन्य सबूत और परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हो सकते हैं।

 
सुप्रीम कोर्ट
 

दुष्कर्म का हर मामला अलग, चोट जरूरी नहीं – सुप्रीम कोर्ट

जस्टिस संदीप मेहता और प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि हर दुष्कर्म पीड़िता के

शरीर पर चोट के निशान हों, यह जरूरी नहीं है। परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए न्याय किया जाएगा।


40 साल पुराना मामला, शिक्षक को मिली 5 साल की सजा

मामला 1984 का है, जहां एक ट्यूशन टीचर पर बीए की छात्रा से दुष्कर्म करने का आरोप था। आरोपी ने बचाव में तर्क दिया कि पीड़िता के शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं थे, इसलिए दुष्कर्म नहीं हुआ। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए आरोपी को 5 साल की सजा बरकरार रखी।


क्या था पूरा मामला?

  • 19 मार्च 1984 को पीड़िता ट्यूशन पढ़ने आरोपी के घर गई थी।

  • आरोपी ने जबरन पीड़िता को बिस्तर पर धकेल दिया और कपड़े से उसका मुंह बंद कर दिया।

  • धमकी दी कि अगर उसने शोर मचाया तो उसे जान से मार देगा।

  • इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 2010 में दोषी ठहराने का ट्रायल कोर्ट का फैसला बरकरार रखा।

  • आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, लेकिन कोर्ट ने सजा में कोई राहत नहीं दी।


SC का सख्त संदेश:

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला दुष्कर्म पीड़िताओं के लिए न्यायिक प्रणाली में भरोसा बढ़ाने वाला है। कोर्ट ने साफ कर दिया कि मेडिकल रिपोर्ट में चोट न होने का मतलब यह नहीं कि अपराध नहीं हुआ। अब, यह फैसला अन्य मामलों में भी नजीर बन सकता है।

 


Comments


Join our mailing list

bottom of page