हाईकोर्ट ने शहर में ई-रिक्शों की संख्या बढ़ने से पैदा हो रही ट्रैफिक समस्या पर चिंता जताई। कोर्ट ने राज्य सरकार से इस मामले में जल्द नीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

विधिक संवाददाता | शुभांकर भानू
लखनऊ, 26 अगस्त। राजधानी लखनऊ में लगातार बढ़ रही ई-रिक्शों की संख्या को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने कहा कि ई-रिक्शों की बढ़ती संख्या शहर की यातायात व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल रही है और सरकार इस स्थिति पर निष्क्रिय नहीं रह सकती।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शहर में ई-रिक्शों की संख्या को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार को जल्द प्रभावी नीति तैयार करनी होगी। अदालत ने इस संबंध में सरकार से आवश्यक कदम उठाने को कहा है।
शहर में करीब 80 हजार ई-रिक्शे
कोर्ट के सामने बताया गया कि लखनऊ में करीब 80 हजार ई-रिक्शे संचालित हो रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या में ई-रिक्शों के सड़कों पर होने से यातायात व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।
अदालत ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कहा कि शहर की यातायात व्यवस्था को देखते हुए ई-रिक्शों के संचालन और संख्या को लेकर स्पष्ट नीति की आवश्यकता है।
सरकार से जल्द कार्रवाई की अपेक्षा
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर केवल निष्क्रिय रहकर स्थिति को नहीं देख सकती। ई-रिक्शों की बढ़ती संख्या से उत्पन्न यातायात संबंधी समस्याओं को नियंत्रित करने के लिए सरकार को समयबद्ध तरीके से कदम उठाने होंगे।
कोर्ट के निर्देशों के बाद अब सरकार की ओर से ई-रिक्शों की संख्या, संचालन और ट्रैफिक प्रबंधन को लेकर संभावित नीति पर कदम उठाए जाने की उम्मीद है।
मामले में अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी। उस सुनवाई में सरकार की ओर से उठाए गए कदमों और इस संबंध में तैयार की जा रही नीति पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
Also read: रक्षाबंधन से पहले मिठाई फैक्ट्री पर छापा, कीड़ों वाला खोया और गंदे टीनों में मिले रसगुल्ले
















