सहारनपुर में मस्जिद ढहाए जाने के बाद बसपा प्रमुख ने उठाए सवाल, कहा- धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई में कानून और निष्पक्षता का पालन जरूरी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में कथित अवैध धार्मिक स्थलों के खिलाफ चल रही कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद ढहाए जाने के बाद बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती ने योगी आदित्यनाथ सरकार की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने सरकार से ऐसे अभियान को तत्काल रोकने और विवादों का समाधान कानून के दायरे में निकालने की मांग की है।
मायावती ने कहा कि किसी भी धर्म के पूजा स्थल से जुड़े मामलों में सरकार को संवेदनशीलता और निष्पक्षता के साथ कार्रवाई करनी चाहिए। उनका जोर इस बात पर रहा कि धर्मनिरपेक्ष सरकार की जिम्मेदारी सभी धर्मों और उनके धार्मिक स्थलों के प्रति समान व्यवहार सुनिश्चित करना है।
सहारनपुर में क्या हुआ?
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को प्रशासन ने 5 सितंबर की सुबह भारी पुलिस सुरक्षा के बीच ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब जिला अदालत ने मस्जिद प्रबंधन की अपील खारिज करते हुए पहले के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें निर्माण को सरकारी जमीन पर अनधिकृत बताया गया था।
मामले में प्रशासन का पक्ष है कि मस्जिद सरकारी भूमि पर बनी थी और उसे हटाने के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया। वहीं, मस्जिद प्रबंधन ने कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि उसे पर्याप्त कानूनी प्रक्रिया का अवसर नहीं मिला। प्रबंधन की ओर से मामले को आगे अदालत में चुनौती देने की बात भी सामने आई है।
मायावती ने क्या कहा?
मायावती ने उत्तर प्रदेश में मस्जिदों और अन्य धार्मिक स्थलों को अवैध घोषित कर गिराए जाने की कार्रवाई पर चिंता जताते हुए सरकार से इसे रोकने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों का समाधान दूसरे वैधानिक उपायों के जरिए निकाला जाना चाहिए, ताकि किसी समुदाय में असुरक्षा या असंतोष की स्थिति पैदा न हो।
बसपा प्रमुख ने कानून के शासन को मजबूत करने पर जोर देते हुए न्यायपालिका से भी ऐसे संवेदनशील मामलों पर उचित ध्यान देने की अपील की। साथ ही उन्होंने सभी पक्षों से शांति और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने का आग्रह किया।
कार्रवाई पर बढ़ा राजनीतिक विवाद
सहारनपुर की घटना के बाद विपक्षी दलों ने भी राज्य सरकार पर निशाना साधा है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं ने कार्रवाई की आलोचना की है, जबकि प्रशासन की ओर से इसे न्यायिक आदेश के अनुपालन में की गई कार्रवाई बताया गया है। घटना के दौरान इलाके में भारी पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती की गई थी।
इस बीच, कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने दावा किया कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोकने के लिए उनके आवास पर पुलिस तैनात की गई और उन्हें नजरबंद रखा गया। प्रशासन की कार्रवाई और विपक्ष के आरोपों के बीच यह मामला अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई बनी राजनीतिक मुद्दा
उत्तर प्रदेश में सरकारी जमीन या सार्वजनिक परिसरों में बने कथित अनधिकृत धार्मिक ढांचों को लेकर कार्रवाई पहले भी राजनीतिक विवाद का कारण रही है। सहारनपुर की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि धार्मिक स्थलों से जुड़े अतिक्रमण के मामलों में प्रशासनिक कार्रवाई और धार्मिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन कैसे कायम किया जाए।
मायावती की मांग के बाद अब इस मुद्दे पर राज्य सरकार की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी। फिलहाल सरकार की ओर से कार्रवाई को कानून और न्यायिक प्रक्रिया के तहत किए जाने की बात कही जा रही है, जबकि विपक्ष इसे सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील मुद्दा बता रहा है।
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