जस्टिस शेखर बी सराफ की बेंच ने कहा- संवेदनशील जानकारी होने से मिली छूट, सक्षम कोर्ट/आयोग में ही होगा समाधान

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सूचना के अधिकार (RTI) कानून से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट व्यवस्था दी है कि RTI आवेदन के जरिए किसी भी आवेदक को CCTV फुटेज सीधे नहीं दी जा सकती। यह आदेश जस्टिस शेखर बी सराफ और जस्टिस अभ्देश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने शोभित कश्यप नामक व्यक्ति की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।
मामले के अनुसार, शोभित कश्यप ने 20 मार्च 2025 को एक RTI आवेदन दाखिल कर कई जानकारियां मांगी थीं, जिसमें पूरी CCTV फुटेज उपलब्ध कराने की मांग भी शामिल थी। जब संबंधित अधिकारी ने यह जानकारी मुहैया नहीं कराई, तो कश्यप ने आरोप लगाते हुए अधिकतम 25 हजार रुपये तक के जुर्माने और कथित परेशानी के एवज़ में मुआवजे की भी मांग कर डाली।
सुनवाई के दौरान राज्य सूचना आयोग ने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि CCTV फुटेज में संवेदनशील जानकारी शामिल हो सकती है, इसलिए इसे RTI एक्ट की धारा 8(1)(g) के तहत मिली छूट (अपवाद) के अंतर्गत आवेदक को सीधे नहीं दिया जा सकता। हालांकि आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि कोर्ट या आयोग के विशेष निर्देश पर ऐसी फुटेज उपलब्ध कराई जा सकती है।
वहीं याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए दलील दी गई कि CCTV फुटेज को सुरक्षित रखवाना नागरिक का वैधानिक अधिकार है। इस पर हाईकोर्ट ने माना कि सक्षम अदालत या आयोग के पास वाकई यह अधिकार सुरक्षित है कि वह जरूरत पड़ने पर फुटेज को मंगवाने और सुरक्षित रखने का आदेश दे सके। लेकिन कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि मौजूदा मामले में कश्यप ने अब तक किसी सक्षम अदालत या आयोग के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई थी, बल्कि केवल RTI आवेदन के जरिए सीधे फुटेज मांगी थी।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी कि मौजूदा परिस्थिति में CCTV फुटेज सीधे आवेदक को नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कश्यप उचित अदालत या सक्षम फोरम के समक्ष विधिवत शिकायत दाखिल करते हैं, तो संबंधित फोरम फुटेज को सुरक्षित रखने और जांच के लिए असल फुटेज मंगाने का आदेश दे सकता है। इसी टिप्पणी के साथ अदालत ने याचिका का निस्तारण कर दिया।
Also Read: लखनऊ के डंडइया बाजार में किराना स्टोर पर चोरी, 50 हजार के ड्राई फ्रूट व नगदी पार


















