13 कंपनियों-संस्थाओं के टेंडर, अनुबंध और भुगतान का ब्योरा मांगा; आजम खान के मंत्री कार्यकाल से जुड़े काम भी जांच के दायरे में

लखनऊ: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उत्तर प्रदेश जल निगम से जुड़े पुराने कार्यों और ठेकों की जांच का दायरा बढ़ाया है। एजेंसी ने 2012 से अब तक के विभिन्न कार्यों से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा है। जांच में टेंडर प्रक्रिया, ठेकेदार कंपनियों, अनुबंध, भुगतान और संबंधित बैंक खातों की जानकारी शामिल बताई जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ED ने 13 बड़ी कंपनियों और संस्थाओं से जुड़े ठेकों तथा उनसे संबंधित दस्तावेजों का ब्योरा मांगा है। एजेंसी यह जानकारी जुटा रही है कि किन कंपनियों को काम मिला, टेंडर किस प्रक्रिया के तहत दिए गए और परियोजनाओं के लिए जारी सरकारी धन का भुगतान किन खातों में हुआ।
2012 से शुरू हुई जांच की कड़ी
जांच का एक हिस्सा उस अवधि से जुड़ा है जब 2012 से 2017 के बीच आजम खान उत्तर प्रदेश के नगर विकास मंत्री थे। उस समय जल निगम नगर विकास विभाग के अधीन था। ED की मौजूदा जांच को आजम खान, जौहर ट्रस्ट और जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की पड़ताल से भी जोड़ा जा रहा है।
हालांकि, किसी ठेके या भुगतान में अनियमितता सामने आना अभी जांच का विषय है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि जिन कंपनियों या अधिकारियों का रिकॉर्ड मांगा गया है, वे सभी किसी अपराध में आरोपी हैं।
टेंडर से भुगतान तक जांच का फोकस
ED की पड़ताल में कथित तौर पर यह समझने की कोशिश की जा रही है कि जल निगम में उस अवधि के दौरान ठेके किस आधार पर आवंटित किए गए, संबंधित अधिकारियों की क्या भूमिका रही और सरकारी धन का भुगतान किस तरह हुआ।
वर्तमान जल जीवन मिशन के आधिकारिक पोर्टल पर भी उत्तर प्रदेश में विभिन्न एजेंसियों और कंपनियों को आवंटित योजनाओं तथा भुगतान से संबंधित विस्तृत आंकड़े उपलब्ध हैं। पोर्टल पर हजारों योजनाओं और अलग-अलग एजेंसियों का रिकॉर्ड दर्ज है।
जांच अभी दस्तावेज जुटाने के चरण में
जल निगम से रिकॉर्ड मांगे जाने का मतलब यह नहीं है कि जांच में अनियमितता साबित हो गई है। ED दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल के बाद ही यह स्पष्ट कर सकेगी कि किसी ठेके, भुगतान या धन के प्रवाह में नियमों का उल्लंघन हुआ था या नहीं।
आने वाले चरण में टेंडर रिकॉर्ड, अनुबंध, भुगतान दस्तावेज और बैंकिंग विवरण की जांच से यह सामने आ सकता है कि एजेंसी को किन लेनदेन या परियोजनाओं पर विशेष संदेह है।
Also Read: 27 सितंबर को CM योगी की PWD समीक्षा बैठक



By











