बिना सेना की NOC के फायरिंग रेंज में नए निर्माण की मंजूरी नहीं; लखनऊ मंडलायुक्त, DM और LDA VC को 9 अक्टूबर को पेश होने का आदेश

लखनऊ: अर्जुनगंज स्थित सेना की फायरिंग रेंज में लगातार निर्माण और वैकल्पिक फायरिंग रेंज की व्यवस्था में देरी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अधिसूचित फायरिंग रेंज में सक्षम सैन्य प्राधिकरण की सहमति या NOC के बिना किसी नए निर्माण को मंजूरी नहीं दी जाएगी।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजिव शुक्ल की खंडपीठ ने शुक्रवार को 2011 से लंबित जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि विकास प्राधिकरण या निर्माण की अनुमति देने वाली किसी भी सरकारी एजेंसी को पहले सेना की अनुमति लेनी होगी। मौजूदा मामले में सक्षम सैन्य प्राधिकरण आर्मी कमांडर, सेंट्रल कमांड, लखनऊ को माना गया है।
वैकल्पिक फायरिंग रेंज में देरी पर जवाब मांगा
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि सेना के लिए लंबी दूरी की फायरिंग के लिए वैकल्पिक स्थल उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। इस पर अदालत ने अधिकारियों से पूछा कि पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद वैकल्पिक स्थान की पहचान और उसे उपलब्ध कराने में इतनी देरी क्यों हुई।
हाईकोर्ट ने लखनऊ मंडलायुक्त, लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के उपाध्यक्ष और लखनऊ के जिलाधिकारी को तलब किया है। इन अधिकारियों को अगली सुनवाई में यह बताना होगा कि वैकल्पिक फायरिंग रेंज के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए और प्रक्रिया में देरी की वजह क्या रही। आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव को भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने का निर्देश दिया गया है।
निर्माण से सेना की ट्रेनिंग प्रभावित होने का मुद्दा
अदालत ने कहा कि फायरिंग रेंज में पहले से हुए निर्माण के कारण सेना के लिए फायरिंग और प्रशिक्षण गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। कोर्ट ने मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय बताते हुए संबंधित सरकारी अधिकारियों को इसे उचित गंभीरता से लेने की बात कही।
यह मामला 2011 में ब्रिगेडियर तिरबानी प्रसाद की ओर से दाखिल जनहित याचिका से जुड़ा है। इसमें अर्जुनगंज क्षेत्र में सेना की फायरिंग रेंज की जमीन पर कथित अतिक्रमण और निर्माण का मुद्दा उठाया गया था।
अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को
हाईकोर्ट ने अधिकारियों को 9 अक्टूबर 2026 को अदालत के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया है। तब वैकल्पिक फायरिंग रेंज की पहचान, उपलब्धता और पुराने आदेशों के अनुपालन को लेकर अधिकारियों से स्थिति स्पष्ट करने को कहा जाएगा।
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