लखनऊ बेंच का फैसला: रेस्टोरेंट, कैफे और होटल के निर्धारित स्मोकिंग एरिया में भी हुक्का परोसना प्रतिबंधित; अलग हुक्का बार लाइसेंस का भी प्रावधान नहीं

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में हुक्का बार और रेस्टोरेंट-कैफे के स्मोकिंग जोन को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मंगलवार को अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रेस्टोरेंट, कैफे, होटल और अन्य सार्वजनिक स्थानों में बनाए गए निर्धारित स्मोकिंग एरिया में भी ग्राहकों को हुक्का उपलब्ध या परोसा नहीं जा सकता।
न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति ए.के. चौधरी की खंडपीठ ने हुक्का बार के संचालन से जुड़ी मुख्य याचिका समेत 80 याचिकाओं को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि वैध खाद्य प्रतिष्ठान का लाइसेंस रखने वाले रेस्टोरेंट को निर्धारित स्मोकिंग एरिया में हुक्का उपलब्ध कराने की अनुमति दी जाए और पुलिस की कार्रवाई से संरक्षण दिया जाए।
2017 के नियमों को आधार बनाया
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में COTPA, 2003 और Prohibition of Smoking in Public Places Rules, 2008 के प्रावधानों की व्याख्या की। कोर्ट ने खास तौर पर 2017 में नियम 4(3) में किए गए संशोधन का उल्लेख किया, जिसमें स्मोकिंग एरिया में “any service” यानी किसी भी सेवा की अनुमति नहीं होने की बात कही गई है।
अदालत के मुताबिक, हुक्का तैयार करना, उसमें तंबाकू या अन्य सामग्री भरना, कोयला लगाना, उसे ग्राहक तक पहुंचाना या बाद में कोयला बदलना जैसी गतिविधियां सेवा के दायरे में आती हैं। इसलिए इन्हें निर्धारित स्मोकिंग एरिया में भी नहीं किया जा सकता।
ग्राहक खुद हुक्का चलाए तो भी अनुमति नहीं
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह दलील भी दी गई थी कि अगर तैयार हुक्का ग्राहक को दे दिया जाए और वह खुद उसका इस्तेमाल करे, तो इसे सेवा के बजाय उपकरण किराये पर देने के रूप में माना जा सकता है।
हाईकोर्ट ने इस तर्क को भी स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि हुक्का तैयार करने और उसे इस्तेमाल योग्य बनाने की प्रक्रिया में सेवा का तत्व मौजूद रहता है। केवल ग्राहक के खुद हुक्का चलाने से गतिविधि की कानूनी प्रकृति नहीं बदल जाती।
हुक्का बार के लिए अलग लाइसेंस का भी प्रावधान नहीं
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा विभाग और नगर निकायों के पास हुक्का बार संचालन के लिए अलग लाइसेंस जारी करने का अधिकार नहीं है। वहीं, COTPA के तहत पुलिस को कानून के उल्लंघन की स्थिति में तलाशी, जब्ती और दंडात्मक कार्रवाई करने की शक्तियां हासिल हैं।
हाईकोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों पर गैर-धूम्रपान करने वालों के स्वच्छ हवा में सांस लेने के अधिकार को भी फैसले में महत्वपूर्ण माना। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े अधिकारों को ऐसे व्यावसायिक हितों से अलग देखा जाना चाहिए जो प्रतिबंधित धूम्रपान गतिविधियों से जुड़े हों।
फैसला मुख्य सचिव और DGP को भेजा जाएगा
हाईकोर्ट ने अपने फैसले की प्रति उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को आवश्यक अनुपालन के लिए भेजने का निर्देश दिया है। अदालत ने राज्य सरकार से मौजूदा कानूनी व्यवस्था के तहत आवश्यक कदम उठाने की अपेक्षा भी जताई है।
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