सौरभ हत्याकांड में अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड सुनाया। फैसले से पहले अदालत ने आरोपियों का पक्ष भी सुना। अब सजा की कानूनी प्रक्रिया और आगे की अपील पर नजर रहेगी।

मेरठ: चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में अदालत ने मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों को सौरभ की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया। इस फैसले के साथ लंबे समय से चर्चा में रहे मामले में सुनवाई का अहम चरण पूरा हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने सजा तय करने से पहले दोनों दोषियों का पक्ष सुना। अभियोजन पक्ष ने मामले की गंभीरता और अपराध की परिस्थितियों को देखते हुए कड़ी सजा की मांग की थी। अदालत ने सुनवाई के बाद दोनों को मृत्युदंड सुनाया।
क्या था नीला ड्रम हत्याकांड?
यह मामला मार्च 2025 में सामने आया था, जब मर्चेंट नेवी में कार्यरत सौरभ राजपूत का शव मेरठ स्थित घर में एक नीले प्लास्टिक ड्रम से बरामद हुआ था। शव को छिपाने के लिए ड्रम में सीमेंट भरे जाने की बात जांच में सामने आई थी। इस घटना के बाद मामला देशभर में चर्चा का विषय बन गया।
अभियोजन पक्ष ने मुकदमे के दौरान परिस्थितिजन्य, फॉरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा। अदालत ने 30 सितंबर 2026 को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को हत्या तथा साक्ष्य मिटाने के अपराधों में दोषी ठहराया था। इसके बाद 14 अक्टूबर को दोनों को मृत्युदंड सुनाया गया।
सजा के बाद आगे क्या होगा?
फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद भी कानूनी प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है। मृत्युदंड को लागू करने से पहले संबंधित हाईकोर्ट की पुष्टि आवश्यक होती है। दोषियों को कानून के तहत फैसले को चुनौती देने का अवसर भी मिलता है। इसलिए अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने और सजा के अंतिम रूप से लागू होने के बीच कानूनी प्रक्रिया के चरण बाकी रहते हैं।
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