344 लोगों के नाम पर भुगतान में अनियमितता के आरोप; एक ही कर्मचारी को दो से तीन बार रकम देने की बात सामने आई, अधिशासी अभियंता प्रमोद कुमार को लखनऊ तलब किए जाने की सूचना।

मिर्जापुर/लखनऊ। मिर्जापुर के सिंचाई विभाग के लघु डाल नहर प्रखंड में करीब 15.58 करोड़ रुपये के कथित फर्जी एरियर भुगतान का मामला सामने आने के बाद विभाग में हलचल तेज हो गई है। शुरुआती जांच में 344 लोगों के नाम पर कुल 15 करोड़ 58 लाख 61 हजार 5 रुपये के भुगतान में अनियमितताओं की बात सामने आई है। मामले की जांच के लिए महालेखाकार कार्यालय, प्रयागराज की ऑडिट टीम अभिलेखों की पड़ेगा कर रही है।
विभागीय रिकॉर्ड की जांच में एक ही कर्मचारी को दो से तीन बार भुगतान किए जाने और एरियर की गणना में संदिग्ध अंतर मिलने की बात सामने आई है। मामले में वरिष्ठ सहायक लिपिक और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। आरोपी लिपिक जितेंद्र कुमार को निलंबित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, भुगतान में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच अभी जारी है।
344 लोगों के नाम पर भुगतान की जांच
प्रारंभिक जांच के मुताबिक, लघु डाल पंप कैनाल खंड में वेतन एरियर के नाम पर बड़ी राशि का भुगतान किया गया। आरोप है कि भुगतान के लिए संदिग्ध बैंक खाते और बिलों का इस्तेमाल हुआ। जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि जिन लोगों के नाम पर रकम जारी की गई, वे वास्तव में विभाग के कर्मचारी थे या नहीं।
अधिशासी अभियंता प्रमोद कुमार की ओर से दी गई शिकायत के आधार पर शहर कोतवाली में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने प्राथमिकी में नामजद जितेंद्र कुमार और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ जांच शुरू की है। किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता अभी जांच का विषय है।
एक कर्मचारी को कई बार भुगतान किए जाने का आरोप
ऑडिट में एरियर की गणना से जुड़े दस्तावेजों में भी सवाल उठे हैं। कुछ मामलों में देय वेतन और पहले भुगतान किए गए वेतन के बीच चार से पांच वार्षिक वेतन वृद्धि के बराबर अंतर दर्शाया गया। जांच अधिकारियों ने यह स्पष्ट करने को कहा है कि संबंधित कर्मचारियों को कितनी वेतन वृद्धि का लाभ दिया गया और इसके लिए सक्षम अधिकारी का आदेश कहां है।
कुछ भुगतान के दस्तावेजों में आवश्यक आदेशों की प्रतियां नहीं मिलने और एक ही कर्मचारी को एक से अधिक बार रकम दिए जाने की बात भी सामने आई है। इन बिंदुओं की पुष्टि के लिए मूल बिल, वेतन निर्धारण पत्र और कोषागार से जुड़े रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है।
छुट्टी के दिन भी जारी रही अभिलेखों की पड़ेगा
मामले की गंभीरता को देखते हुए ऑडिट टीम ने विभागीय रिकॉर्ड की जांच तेज कर दी है। जांच में केवल एरियर भुगतान ही नहीं, बल्कि वर्ष 2016 से अब तक कार्यालय में तैनात अधिकारियों-कर्मचारियों और विभिन्न मदों में किए गए भुगतान का ब्योरा भी जुटाया जा रहा है।
टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि भुगतान की प्रक्रिया में कहां गड़बड़ी हुई, बिल किसने तैयार किए और उन्हें किस स्तर पर मंजूरी दी गई। जांच के दौरान अवकाश के दिन भी अभिलेखों की पड़ेगा किए जाने की जानकारी सामने आई है।
अधिशासी अभियंता प्रमोद कुमार को लखनऊ बुलाए जाने की सूचना
मामले में अधिशासी अभियंता प्रमोद कुमार को लखनऊ तलब किए जाने की जानकारी सामने आई है। उनसे भुगतान प्रक्रिया और विभागीय रिकॉर्ड के संबंध में स्पष्टीकरण मांगे जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, उनके तलब किए जाने के उद्देश्य और पूछताछ की स्थिति की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
प्रयागराज स्थित महालेखाकार कार्यालय की ऑडिट टीम की रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितनी राशि का भुगतान नियमों के विरुद्ध हुआ और किन अधिकारियों या कर्मचारियों की जिम्मेदारी बनती है। फिलहाल पुलिस और विभागीय स्तर पर जांच जारी है।
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