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बलरामपुर में बच्ची की मौत पर हाईकोर्ट का संज्ञान

तेज DJ के बीच कक्षा में गिरी थी दूसरी की छात्रा, ध्वनि प्रदूषण पर नई स्वतः संज्ञान जनहित याचिका दर्ज

लखनऊ: बलरामपुर में दूसरी कक्षा की सात वर्षीय छात्रा की मौत के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने स्वतः संज्ञान लिया है। अदालत ने घटना के साथ प्रदेश में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण के मुद्दे पर अलग से स्वतः संज्ञान जनहित याचिका दर्ज करने का निर्देश दिया है।

मामला 22 सितंबर 2026 का है। रिपोर्टों के मुताबिक, बलरामपुर के भगौतीगंज स्थित डिवाइन पब्लिक स्कूल में छात्रा कक्षा में थी, तभी पास से तेज आवाज में DJ और लाउडस्पीकर के साथ जुलूस गुजर रहा था। इसी दौरान छात्रा अचानक कक्षा में गिर गई। बाद में उसे चिकित्सकीय उपचार के लिए ले जाया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी।

मौत के कारण पर कोर्ट ने नहीं दिया निष्कर्ष

मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि अदालत ने बच्ची की मौत के कारण को लेकर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला है।

हालांकि, अदालत ने कहा कि घटना के दौरान बहुत तेज आवाज में लाउडस्पीकर या म्यूजिक सिस्टम बजाए जाने और उसके तुरंत बाद बच्ची के कक्षा में गिरने की जानकारी को देखते हुए मामले का संज्ञान लेना जरूरी है। अदालत ने ध्वनि प्रदूषण को गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि इसके बावजूद नियमों का उल्लंघन लगातार सामने आ रहा है।

DM और SP से रिपोर्ट तलब

हाईकोर्ट ने इस घटना के संबंध में बलरामपुर के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से रिपोर्ट और निर्देश प्राप्त करने को कहा है। स्कूल को भी मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया गया है, ताकि वह अदालत के समक्ष अपना पक्ष रख सके।

अदालत यह भी देखेगी कि ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार अधिकारी और विभाग क्या कदम उठा रहे हैं और मौजूदा नियमों का पालन किस तरह सुनिश्चित किया जा रहा है।

ध्वनि प्रदूषण पर अलग PIL

हाईकोर्ट ने घटना और उससे जुड़े व्यापक मुद्दों के लिए अलग स्वतः संज्ञान जनहित याचिका दर्ज करने का निर्देश दिया है। इस मामले में अदालत पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 और ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के पालन की स्थिति की भी समीक्षा करेगी।

अदालत ने कहा कि अगर मौजूदा उपायों के बावजूद ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो रहा है तो नियमों के पालन की नियमित निगरानी के लिए व्यवस्था पर विचार करना होगा। साथ ही, नियमों को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।

12 अक्टूबर को होगी सुनवाई

हाईकोर्ट ने नई स्वतः संज्ञान PIL को 12 अक्टूबर 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। वहीं, ध्वनि प्रदूषण से जुड़े पहले से लंबित मामले की सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी।

अदालत ने यह भी कहा कि बच्ची के माता-पिता और स्कूल प्रशासन पर किसी तरह का दबाव नहीं डाला जाना चाहिए और स्कूल के कामकाज में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।

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