LDA ने बढ़ाई टेंडर फॉर्म की फीस, अब ₹8,000 तक देना होगा शुल्क

लखनऊ: लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) में विकास कार्यों के लिए जारी होने वाले टेंडर फॉर्म की फीस बढ़ा दी गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 21 अक्टूबर को मंजूरी मिलने के बाद नई दरें लागू की गई हैं। अब टेंडर की अनुमानित लागत के आधार पर ठेकेदारों को ₹1,500 से ₹8,000 तक शुल्क देना होगा।

इस बदलाव का असर प्राधिकरण के तहत सड़क निर्माण, नाली निर्माण और अन्य विकास कार्यों के लिए निविदा प्रक्रिया में हिस्सा लेने वाले ठेकेदारों पर पड़ सकता है। हालांकि, नई दरों को मंजूरी दे-ने वाले आदेश की प्रति और पुरानी फीस की तुलना उपलब्ध नहीं होने के कारण शुल्क में हुई वास्तविक बढ़ोतरी की मात्रा की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

टेंडर की लागत के हिसाब से तय होगी फीस

नई व्यवस्था के तहत टेंडर फॉर्म की फीस चार श्रेणियों में निर्धारित की गई है।

टेंडर की अनुमानित लागत नई फीस
10 लाख रुपये तक ₹1,500
10 लाख से अधिक और 25 लाख रुपये तक ₹2,500
25 लाख से अधिक और 75 लाख रुपये तक ₹5,000
75 लाख रुपये से अधिक ₹8,000

इन दरों के अनुसार, अधिक लागत वाले टेंडर में हिस्सा लेने के लिए ठेकेदारों को ज्यादा शुल्क देना होगा। संबंधित निविदा की आधिकारिक शर्तों में दी गई फीस ही अंतिम रूप से मान्य होगी।

सड़क और अन्य विकास कार्यों की निविदाओं पर असर

LDA के तहत शहर में सड़क, नाली, पार्क और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्यों के लिए निविदाएं जारी की जाती हैं। उत्तर प्रदेश के आधिकारिक ई-टेंडर पोर्टल पर प्राधिकरण की विभिन्न निर्माण संबंधी निविदाएं भी सूचीबद्ध हैं।

फॉर्म फीस में बदलाव से निविदा प्रक्रिया में भाग लेने वाले ठेकेदारों की शुरुआती लागत प्रभावित हो सकती है। खासकर उन ठेकेदारों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण होगा जो अलग-अलग परियोजनाओं के लिए कई निविदाओं में हिस्सा लेते हैं।

हालांकि, फीस बढ़ने से ठेकेदारों की भागीदारी या विकास कार्यों की लागत पर कितना असर पड़ेगा, यह संबंधित निविदाओं और ठेकेदारों की प्रतिक्रिया के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगा।

आधिकारिक आदेश से स्पष्ट होंगे बदलाव के पूरे विवरण

नई फीस लागू होने की तारीख, पुरानी दरें और किन श्रेणियों की निविदाओं पर यह व्यवस्था लागू होगी, इन बिंदुओं की पुष्टि LDA के आधिकारिक आदेश से की जानी चाहिए। उपलब्ध जानकारी के आधार पर नई दरों का विवरण दिया गया है, लेकिन मंजूरी संबंधी आदेश की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।

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