जियाउल उलूम मस्जिद के मामले में संबंधित पक्षों को आपत्ति दर्ज कराने का समय; प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर हलचल तेज

सीतापुर: उत्तर प्रदेश के सीतापुर में जियाउल उलूम मस्जिद को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई की तैयारी शुरू होने की जानकारी सामने आई है। मस्जिद परिसर पर नोटिस चस्पा किए जाने के बाद संबंधित पक्षों को अपनी आपत्ति दर्ज कराने के लिए सात दिन का समय दिया गया है। इस अवधि में वक्फ बोर्ड और संबंधित मुस्लिम संगठनों की ओर से अपना पक्ष रखने की बात कही जा रही है।
नोटिस सामने आने के बाद इलाके में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सात दिन की अवधि पूरी होने के बाद प्रशासन की ओर से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई किस तारीख को की जाएगी। इसलिए फिलहाल इसे ध्वस्तीकरण की तैयारी/नोटिस की कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है, न कि तत्काल ध्वस्तीकरण के तौर पर।
मामले में वक्फ संपत्ति से जुड़े पक्षों के लिए संबंधित दस्तावेज और आपत्तियां प्रस्तुत करना अहम होगा। उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की आधिकारिक व्यवस्था के अनुसार वक्फ संपत्तियों का विवरण और प्रबंधन संबंधी रिकॉर्ड बोर्ड के स्तर पर दर्ज किए जाते हैं।
सीतापुर प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर जिले से जुड़े मौजूदा आदेश और अधिसूचनाएं प्रकाशित की जाती हैं। उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों में फिलहाल जियाउल उलूम मस्जिद से संबंधित यह नोटिस सार्वजनिक सूची में दिखाई नहीं देता है। ऐसे में ध्वस्तीकरण की अंतिम कार्रवाई या उसके आधार को लेकर प्रशासन की ओर से जारी विस्तृत आदेश/नोटिस की पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।
गौरतलब है कि सीतापुर में इससे पहले भी सरकारी जमीन पर कथित अवैध निर्माण को लेकर प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की है। मार्च 2026 में लहरपुर क्षेत्र में तालाब और कब्रिस्तान की जमीन पर बने एक मस्जिदनुमा निर्माण को राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत नोटिस और न्यायिक आदेश के बाद हटाया गया था। हालांकि, वह मामला जियाउल उलूम मस्जिद से अलग है।
अब जियाउल उलूम मस्जिद के मामले में अगले सात दिन महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। संबंधित पक्षों की आपत्ति और प्रशासन के अंतिम निर्णय के बाद ही आगे की कार्रवाई की तस्वीर साफ होगी।
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