सुप्रीम कोर्ट का अनोखा सुझाव, ई-चालान वसूली के लिए बिजली कनेक्शन से जोड़ने पर विचार; लखनऊ समेत पूरे देश में चर्चा

लखनऊ: अगर आपने ट्रैफिक नियम तोड़ा है और चालान लंबे समय से नहीं भरा है, तो भविष्य में इसकी वसूली बिजली बिल के जरिए करने का रास्ता अपनाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने लंबित ई-चालानों की वसूली को लेकर सुनवाई के दौरान यह सुझाव दिया है। हालांकि, फिलहाल यह कोई लागू व्यवस्था या अदालत का आदेश नहीं है, बल्कि वसूली के संभावित तरीकों में से एक सुझाव है।
28 सितंबर को जस्टिस जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि केवल ई-चालान जारी करना पर्याप्त नहीं है, असली चुनौती जुर्माने की वसूली है। सुनवाई के दौरान अदालत ने सुझाव दिया कि लंबित चालान की रकम को बिजली बकाये से जोड़ने जैसे विकल्प पर सरकार विचार कर सकती है।
45 हजार करोड़ के ई-चालान, वसूली 25 हजार करोड़
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि देशभर में करीब 45,000 करोड़ रुपये के ई-चालान जारी किए जा चुके हैं, लेकिन इनमें से करीब 25,000 करोड़ रुपये की ही वसूली हो पाई है। यानी बड़ी रकम अब भी लंबित है।
इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को केवल चालान काटने के बजाय उसकी वसूली के लिए प्रभावी तंत्र तैयार करने की जरूरत बताई।
बिजली बिल वाला फॉर्मूला क्या है?
अदालत के सामने रखे गए सुझाव के मुताबिक, लंबे समय से लंबित ट्रैफिक चालान को संबंधित व्यक्ति के बिजली बकाये से जोड़ने का विकल्प तलाशा जा सकता है। विचार यह है कि बिजली बिल का भुगतान नहीं करने पर कनेक्शन कटने का जोखिम रहता है, इसलिए इस व्यवस्था से चालान भरने के लिए दबाव बनाया जा सकता है।
लेकिन इसे लागू करने से पहले कई व्यावहारिक सवालों का समाधान जरूरी होगा। मसलन, वाहन मालिक और बिजली कनेक्शन धारक अलग-अलग हों, वाहन किसी किरायेदार के नाम हो, एक ही कनेक्शन पर कई लोग निर्भर हों या सोसायटी में सिंगल-पॉइंट मीटर हो, तो चालान की वसूली किससे और कैसे होगी—यह बड़ा सवाल होगा।
बिजली बिल ही नहीं, कई दूसरे विकल्प भी
सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ बिजली बिल का विकल्प नहीं सुझाया। लंबित चालान वाले वाहनों के खिलाफ रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण रोकने, फिटनेस प्रमाणपत्र रोकने, PUC से जुड़ी सेवाओं पर रोक, ड्राइविंग लाइसेंस नवीनीकरण और वाहन के स्वामित्व हस्तांतरण को प्रतिबंधित करने जैसे उपायों पर भी विचार किया गया।
इसके अलावा ऐसे वाहनों की पहचान के लिए रैंडम चेकिंग और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई की संभावना पर भी चर्चा हुई।
लखनऊ में भी चालान वसूली बड़ी चुनौती
लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश में लंबित ट्रैफिक चालानों की वसूली पहले से ही चुनौती रही है। प्रदेश में चालान वसूली के लिए परिवहन विभाग ने पहले WhatsApp चैटबॉट के जरिए बकायेदार वाहन मालिकों को रिमाइंडर भेजने की व्यवस्था का परीक्षण भी किया था। उस दौरान जनवरी, अप्रैल और मई में जारी चालानों में बड़ी रकम की वसूली लंबित होने की बात सामने आई थी।
ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के सुझाव के बाद अब यह सवाल अहम हो गया है कि उत्तर प्रदेश में लंबित चालानों की वसूली के लिए कौन-सा तरीका सबसे प्रभावी और कानूनी रूप से व्यावहारिक होगा।
अभी बिजली कटने का आदेश नहीं
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी किसी वाहन मालिक का बिजली कनेक्शन सिर्फ चालान नहीं भरने पर काटने का आदेश लागू नहीं हुआ है। बिजली बिल से चालान जोड़ने की बात सुप्रीम कोर्ट की ओर से सुझाए गए संभावित उपायों में शामिल है।
आगे राज्यों और संबंधित विभागों को इन विकल्पों की व्यवहारिकता और कानूनी पहलुओं पर काम करना होगा। यदि ऐसा कोई तंत्र लागू होता है तो लंबित चालानों की वसूली के तरीके में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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