9149 अदालतों की जरूरत के आकलन के बीच पहले चरण में 900 कोर्ट; 9084 पदों के सृजन को भी मंजूरी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में न्यायिक ढांचे को विस्तार देने की दिशा में सरकार ने पहले चरण में 900 नई अदालतों के गठन का रास्ता साफ कर दिया है। राज्य सरकार की ओर से 17 सितंबर को इसका शासनादेश जारी किए जाने की जानकारी इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ को दी गई। यह कदम प्रदेश में कुल 9,149 अतिरिक्त अदालतों की जरूरत के आकलन के तहत उठाया गया है।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ में हुई। कोर्ट के समक्ष सरकार ने बताया कि पहले चरण में 900 अदालतों के गठन को कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है और इसके बाद संबंधित आदेश भी जारी कर दिया गया है। इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले को जरूरत पड़ने पर समीक्षा के लिए अनिश्चितकाल तक के लिए मुल्तवी कर दिया।
900 अदालतों में किस स्तर के कोर्ट होंगे?
सरकार के आदेश के मुताबिक प्रस्तावित 900 अदालतों में अलग-अलग स्तर की अदालतें शामिल हैं। इनमें 237 अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, 391 सिविल जज (सीनियर डिवीजन) और 272 सिविल जज (जूनियर डिवीजन) स्तर की अदालतें शामिल हैं।
इन अदालतों के साथ 9,084 पदों के सृजन को भी मंजूरी दी गई है। इनमें 6,656 नियमित और 2,428 आउटसोर्स पद शामिल हैं। हालांकि, इन पदों पर भर्ती की प्रक्रिया तत्काल शुरू नहीं होगी। शासनादेश में पहले मौजूदा स्वीकृत पदों के मुकाबले खाली पदों को भरने की प्रक्रिया पूरी करने की व्यवस्था बताई गई है।
9,149 अदालतों की जरूरत क्यों पड़ी?
प्रदेश में बड़ी संख्या में मुकदमे लंबित होने और मौजूदा न्यायालयों पर काम के दबाव को देखते हुए अतिरिक्त अदालतों की जरूरत का आकलन किया गया था। राष्ट्रीय अदालत प्रबंधन प्रणाली समिति की रिपोर्ट के आधार पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विभिन्न श्रेणियों में 9,149 अदालतों की आवश्यकता का आकलन किया था। इसी व्यापक योजना के तहत पहले चरण में 900 अदालतों को मंजूरी दी गई है।
नई अदालतों के गठन का उद्देश्य न्यायिक क्षमता बढ़ाना और लंबित मामलों के निस्तारण के लिए अतिरिक्त ढांचा उपलब्ध कराना है। हालांकि, नई अदालतें कब तक पूरी तरह संचालित होंगी, इसके लिए भवन, स्टाफ और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं की प्रक्रिया आगे पूरी की जानी होगी।
हाईकोर्ट में क्यों पहुंचा था मामला?
न्यायिक ढांचे के विस्तार को लेकर हाईकोर्ट में स्वतः संज्ञान के आधार पर जनहित याचिका दर्ज की गई थी। इसी मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने 900 नई अदालतों के गठन और 17 सितंबर को शासनादेश जारी किए जाने की जानकारी अदालत को दी।
अब सरकार द्वारा जारी आदेश के बाद अगले चरण में इन अदालतों को स्थापित करने और उनके लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
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