उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल ने नई पैकेजिंग तैयार करने और मौजूदा स्टॉक के निस्तारण के लिए मोहलत देने की मांग की। प्रदेश अध्यक्ष संजय गुप्ता ने नियमों को जनस्वास्थ्य के लिहाज से उचित बताया।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में ‘पूजा घी’ के नाम से बिकने वाले उत्पादों पर खाद्य सुरक्षा विभाग की सख्ती के बाद व्यापारियों ने नियमों के अनुपालन के लिए अतिरिक्त समय देने की मांग उठाई है। उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल का कहना है कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए नियम जरूरी हैं, लेकिन इन्हें तत्काल प्रभाव से लागू करने पर कारोबारियों और निर्माता कंपनियों के सामने व्यावहारिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने पूजा, हवन और दीपक जलाने के लिए तैयार किए जाने वाले अखाद्य वसा उत्पादों को ‘पूजा घी’ के नाम से बनाने, रखने और बेचने पर रोक लगाई है। विभाग का उद्देश्य ऐसे उत्पादों को खाने योग्य घी से स्पष्ट रूप से अलग करना है, ताकि ग्राहक भ्रम में आकर उनका सेवन न कर लें।
नई पैकिंग और पुराने स्टॉक को लेकर चिंता
उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष संजय गुप्ता ने कहा कि नियमों का उद्देश्य स्वास्थ्य सुरक्षा है और इस दृष्टि से यह कदम उचित है। हालांकि, नियमों को तुरंत लागू करने से उन कारोबारियों को परेशानी हो सकती है, जिनके पास पहले से पैक किया गया स्टॉक मौजूद है। निर्माता कंपनियों को भी नए निर्देशों के अनुरूप पैकेजिंग और लेबलिंग की व्यवस्था करने के लिए समय चाहिए।
व्यापार मंडल ने मांग की है कि कारोबारियों को मौजूदा स्टॉक के निस्तारण और कंपनियों को नई पैकिंग तैयार करने के लिए पर्याप्त मोहलत दी जाए। संगठन इस मुद्दे पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब से मिलकर अपनी बात रखने की तैयारी में है।
पैकेट पर ‘घी’ लिखने पर भी रोक
विभाग के निर्देशों के मुताबिक, पूजा या हवन के लिए बनाए जाने वाले अखाद्य उत्पादों की पैकेजिंग पर ‘घी’ या ‘पूजा के लिए घी’ लिखकर बिक्री नहीं की जा सकेगी। ऐसे उत्पादों पर हिंदी और अंग्रेजी में ‘मानव उपभोग हेतु अनुपयुक्त’ की चेतावनी के साथ निर्धारित काले क्रॉस का निशान लगाना भी अनिवार्य होगा।
विभाग ने खाद्य घी और पूजन के लिए तैयार अखाद्य उत्पादों को एक ही ब्रांड नाम से बेचने पर भी रोक लगाई है। निर्देशों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित स्टॉक जब्त करने और लाइसेंस या पंजीकरण निलंबित करने जैसी कार्रवाई हो सकती है।
अब व्यापारियों की नजर विभाग के साथ होने वाली बातचीत पर है। वे नियमों के उद्देश्य का समर्थन करते हुए उनके अनुपालन के लिए व्यावहारिक समय-सीमा चाहते हैं। हालांकि, अतिरिक्त समय देने की मांग पर विभाग की ओर से राहत मिलने की पुष्टि अभी उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
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