जनवरी और जुलाई में निस्तारित होंगे वेतनमान के मामले, 335 शिक्षकों के लंबित एरियर का भुगतान 5 नवंबर तक करने के निर्देश।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर है। अब चयन वेतनमान और प्रोन्नत वेतनमान से जुड़े मामलों के निस्तारण के लिए शिक्षकों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत विभाग साल में कम से कम दो बार, जनवरी और जुलाई में, पात्र शिक्षकों के मामलों का निस्तारण करेगा। इससे प्रदेश के करीब 6,000 शिक्षकों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इस प्रक्रिया को नियमित करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस संबंध में जल्द शासनादेश जारी किए जाने की संभावना है। अभी कई जिलों में वेतनमान से जुड़े मामलों का निस्तारण साल में केवल एक बार होने के कारण पात्र शिक्षकों की फाइलें लंबित रह जाती हैं। इससे उन्हें आर्थिक लाभ पाने के लिए अतिरिक्त इंतजार करना पड़ता है और कई मामलों में कानूनी विवाद भी सामने आते हैं।
10 साल की सेवा पर चयन, 22 साल पर प्रोन्नत वेतनमान
मौजूदा व्यवस्था के तहत निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले शिक्षकों को 10 वर्ष की सेवा पूरी होने पर चयन वेतनमान और 22 वर्ष की सेवा पर प्रोन्नत वेतनमान का लाभ दिया जाता है। नई प्रस्तावित व्यवस्था में जनवरी तक पात्र होने वाले शिक्षकों के मामले पहले चरण में निस्तारित किए जाएंगे। इसके बाद पात्रता पूरी करने वाले शिक्षकों के मामलों को जुलाई में लिया जाएगा।
इससे पात्रता पूरी होने के बाद भी केवल विभागीय प्रक्रिया में देरी के कारण शिक्षकों को लाभ मिलने में होने वाली परेशानी कम हो सकती है।
335 शिक्षकों के एरियर भुगतान के लिए 5 नवंबर की समयसीमा
शिक्षकों के वेतनमान से जुड़े मामलों के साथ लंबित एरियर भुगतान को लेकर भी निर्देश दिए गए हैं। राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों के 335 शिक्षकों के बकाया एरियर मामलों की जांच कर उनका भुगतान 5 नवंबर तक पूरा करने को कहा गया है।
अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने संबंधित अधिकारियों को लंबित प्रकरणों का नियमानुसार परीक्षण कर समयसीमा के भीतर निस्तारण करने के निर्देश दिए हैं। सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) को भी मामलों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने को कहा गया है।
शिक्षकों को समय पर लाभ मिलने की उम्मीद
नई व्यवस्था लागू होने से चयन और प्रोन्नत वेतनमान से जुड़े मामलों में नियमितता आने की उम्मीद है। इससे न केवल लंबित प्रकरणों की संख्या कम करने में मदद मिल सकती है, बल्कि पात्र शिक्षकों को समय पर आर्थिक लाभ मिलने का रास्ता भी आसान होगा। हालांकि, प्रस्तावित प्रक्रिया के अंतिम नियम शासनादेश जारी होने के बाद स्पष्ट होंगे।
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