मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण में लापरवाही पर सख्ती दिखाई; बुलंदशहर, सीतापुर, गाजियाबाद और अलीगढ़ में डुप्लीकेट वोटरों की शिकायतों पर रिपोर्टिंग मांगी।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची को लेकर निर्वाचन आयोग ने निगरानी और जवाबदेही सख्त कर दी है। मतदाता सूची में गड़बड़ी मिलने पर अब संबंधित कर्मचारियों और निर्वाचन अधिकारियों के साथ जिला निर्वाचन अधिकारी यानी डीएम की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। वहीं, मंडलायुक्तों को अपने मंडल के जिलों में मतदाता सूची से जुड़े कार्यों की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने 24 अक्टूबर को अधिकारियों के साथ हुई वर्चुअल बैठक में स्पष्ट किया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गड़बड़ियों की पुनरावृत्ति होने पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
चार जिलों से डुप्लीकेट वोटरों पर रिपोर्टिंग मांगी
मतदाता सूची में एक से अधिक बार दर्ज नामों से जुड़ी शिकायतों पर बुलंदशहर, सीतापुर, गाजियाबाद और अलीगढ़ के जिला निर्वाचन अधिकारियों से समय पर रिपोर्टिंग नहीं मिलने पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने नाराजगी जताया। इन जिलों को जल्द रिपोर्टिंग भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
निर्वाचन आयोग का जोर है कि आगामी विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) के तहत तैयार होने वाली ड्राफ्ट मतदाता सूची में दोहरी प्रविष्टियां न रहें। शिकायतों की जांच और उन-के निस्तारण में देरी को लेकर भी अधिकारियों को सतर्क किया गया है।
10 अप्रैल के बाद दर्ज फॉर्मों की होगी जांच
निर्देशों के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया 10 अप्रैल 2026 को समाप्त होने के बाद से कंप्यूटर सहायकों द्वारा फीड किए गए फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 की जांच कराई जाएगी।
फॉर्म-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम जुड़वाने, फॉर्म-7 का नाम हटाने और फॉर्म-8 का विवरण सुधारने या निर्धारित परिस्थितियों में बदलाव के लिए किया जाता है। इन फॉर्मों की जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं नाम जोड़ने, हटाने या संशोधित करने की प्रक्रिया में अनियमितता तो नहीं हुई।
आयोग ने कंप्यूटर सहायकों के जरिए मतदाता फॉर्मों की फीडिंग पर रोक लगाने के भी निर्देश दिए हैं। भौतिक रूप से प्राप्त फॉर्मों को BLO ऐप के माध्यम से बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) द्वारा डिजिटल रूप में दर्ज कराया जाएगा। संबंधित अधिकारियों को फॉर्म और दस्तावेज सुरक्षित रखने को भी कहा गया है।
लापरवाही पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा है कि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में गड़बड़ी मिलने पर निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO), सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO) और संबंधित कंप्यूटर सहायक की भूमिका की जांच की जाएगी। इसके साथ ही जिला निर्वाचन अधिकारी की निगरानी में लापरवाही पाए जाने पर उनकी जवाबदेही भी तय होगी।
मंडलायुक्तों को रोल ऑब्जर्वर के रूप में अपने मंडल के जिलों में कामकाज की सघन निगरानी करने की जिम्मेदारी दी गई है। अधिकारियों को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के प्रावधानों का ध्यान रखने को कहा गया है। कर्तव्य उल्लंघन के मामलों में कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है।
शिकायतों के निस्तारण के लिए भी समयसीमा
निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची से संबंधित शिकायतों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करने के निर्देश दिए हैं। ECINET ऐप और मतदाता सेवा पोर्टल पर उपलब्ध ‘बुक अ कॉल विद BLO’ सुविधा के तहत नागरिकों की कॉल रिक्वेस्ट 48 घंटे से अधिक लंबित नहीं रहनी चाहिए।
इसके अलावा, 24 अक्टूबर को आयोजित विशेष अभियान दिवस के दौरान बूथों पर BLO की अनुपस्थिति से जुड़ी शिकायतों पर भी रिपोर्टिंग मांगी गई है। अधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि आगामी विशेष अभियान दिवसों पर ऐसी शिकायतें दोहराई नहीं जानी चाहिए।
निर्वाचन आयोग की इस सख्ती का उद्देश्य मतदाता सूची में दोहरे नामों और अन्य अनियमितताओं को दूर करना तथा आगामी चुनावी प्रक्रिया से पहले सूची की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है।
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