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दौड़ के ट्रैक से जूडो मैट तक, अस्मिता डे का ऐतिहासिक स्वर्णिम सफर

पिता की यादों को ताकत बनाकर अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाया। महिला 48 किग्रा वर्ग के फाइनल में कनाडा की खिलाड़ी को हराया।

अस्मिता डे का ऐतिहासिक स्वर्णिम सफर

संवाददाता | उपासना यादव

नई दिल्ली/ग्लासगो। भारत की जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में इतिहास रचते हुए महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीत लिया। इस जीत के साथ वह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में जूडो में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की पहली खिलाड़ी बन गई हैं।

फाइनल मुकाबले में अस्मिता डे ने कनाडा की हाइडी क्वाच को रोमांचक मुकाबले में हराया। निर्धारित समय तक मुकाबला बराबरी पर रहने के बाद मैच गोल्डन स्कोर तक पहुंचा, जहां अस्मिता ने निर्णायक दांव लगाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

मैच के बाद अस्मिता डे ने कहा, “मुझे कभी नहीं लगा कि मुझसे ज्यादा कोई मजबूत है। आज मैंने खुद से कहा था कि मैं ही चैंपियन हूं। मेरे वजन वर्ग में मैं ही सबसे मजबूत हूं। कोई कितना भी मजबूत क्यों न हो, मैंने पहले ही तय कर लिया था कि आज गोल्ड लेकर ही जाऊंगी।”

उन्होंने कहा, “यह मेरा पहला कॉमनवेल्थ गेम्स है और पहली बार में ही स्वर्ण पदक जीतना मेरे लिए बहुत बड़ी बात है।”

अस्मिता ने अपने दिवंगत पिता को याद करते हुए कहा कि दिसंबर 2025 में उनके पिता का निधन हो गया था। उन्होंने हमेशा उनका साथ दिया और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

दौड़ से शुरू हुआ सफर, जूडो में बनाई पहचान

22 मार्च 2003 को त्रिपुरा के बेलोनिया में जन्मीं अस्मिता डे का शुरुआती खेल जूडो नहीं, बल्कि 800 मीटर दौड़ था। बाद में एक कोच ने उन्हें जूडो से परिचित कराया और यहीं से उनके खेल जीवन ने नई दिशा पकड़ ली।

उनके पिता अर्जुन कुमार डे बेलोनिया में साइकिल मरम्मत की दुकान चलाते थे। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने बेटी के खेल करियर को पूरा सहयोग दिया।

अस्मिता ने अपने शुरुआती प्रशिक्षण के दौरान कोच बीना देबनाथ और बाद में माणिक लाल देब से प्रशिक्षण लिया। वर्ष 2018 में उनका चयन भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के भोपाल क्षेत्रीय केंद्र में हुआ, जहां अनुभवी कोच यशपाल सोलंकी के मार्गदर्शन में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार सफलता

अस्मिता डे वर्ष 2022 में थाईलैंड में आयोजित एशियन कैडेट एवं जूनियर जूडो प्रतियोगिता में अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने वाली त्रिपुरा की पहली जूडो खिलाड़ी बनीं। इसके बाद उन्होंने 2023 में जूनियर एशिया कप (मकाऊ) में स्वर्ण और एशियन ओपन (कुवैत) में रजत पदक जीता।

वर्ष 2025 में मोरक्को के कासाब्लांका अफ्रीकन ओपन में उन्होंने अपना पहला सीनियर अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीता। वहीं 2026 एशियन सीनियर चैंपियनशिप में पांचवें स्थान पर रहते हुए भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया।

घरेलू प्रतियोगिताओं में भी अस्मिता ने खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स और जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप सहित कई प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक अपने नाम किए हैं।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में उन्होंने क्वार्टर फाइनल में स्कॉटलैंड की ईवा इविंग और सेमीफाइनल में समर शॉ को हराकर फाइनल में जगह बनाई। इसके बाद फाइनल में कनाडा की हाइडी क्वाच को हराकर भारत को जूडो का ऐतिहासिक स्वर्ण पदक दिलाया।

Also Read: Commonwealth Games 2026: भारतीय जुडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने जीता स्वर्ण पदक

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