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मार्कशीट फर्जीवाड़ा: फिर सुर्खियों में हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी, मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी से खुले कई राज

लखनऊ में फर्जी मार्कशीट के एक बड़े मामले में एक बार फिर महाराजा अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय, उत्तराखंड का नाम सामने आया है। सरकारी स्कूल में नौकरी के लिए लगाए गए एक अभ्यर्थी के दस्तावेजों की जांच में विश्वविद्यालय की मार्कशीट फर्जी पाई गई, जिसके बाद मामला उजागर हुआ।

गोमतीनगर थाना पुलिस और पूर्वी जोन की क्राइम टीम ने शनिवार को इस गिरोह के मास्टरमाइंड समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में अयोध्या के पूरा कलंदर निवासी सत्येंद्र द्विवेदी, उन्नाव के बीघापुर निवासी अखिलेश कुमार और लखीमपुर खीरी के ईशानगर निवासी सौरभ शर्मा शामिल हैं। पुलिस ने इनके कब्जे से 923 फर्जी मार्कशीट और उन्हें तैयार करने में इस्तेमाल होने वाला सामान भी बरामद किया है।

पुलिस जांच में सामने आया है कि जिन 25 विश्वविद्यालयों के नाम फर्जी दस्तावेजों से जुड़े हैं, उनमें महाराजा अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय भी शामिल है। यह दूसरा मौका है जब इस विश्वविद्यालय का नाम मार्कशीट फर्जीवाड़े में सामने आया है।

पहले भी सामने आ चुका है मामला

इससे पहले वर्ष 2024 में मेरठ के लावड़ स्थित राष्ट्रीय इंटर कॉलेज में प्रवक्ता पद के लिए एक अभ्यर्थी द्वारा इसी विश्वविद्यालय की मार्कशीट लगाई गई थी। संदेह होने पर कॉलेज प्रशासन ने सत्यापन कराया, जिसमें मार्कशीट फर्जी पाई गई थी। उस समय विश्वविद्यालय ने आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी का भी कोई जवाब नहीं दिया था।

तत्कालीन राज्य सूचना आयुक्त द्वारा मौके पर किए गए सत्यापन में यह स्पष्ट हुआ कि विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में संबंधित छात्र का कोई विवरण मौजूद नहीं है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी ऐसी किसी मार्कशीट को जारी करने से इनकार किया था, जिसके बाद स्पष्टीकरण मांगा गया था।

1500 छात्रों को बेची गईं फर्जी मार्कशीट

गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि उन्होंने 2021 से अब तक करीब 1500 छात्रों को फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां बेची हैं। आशंका जताई जा रही है कि इनमें से कई अभ्यर्थियों ने सरकारी और निजी नौकरियों में आवेदन किया होगा और कुछ की नियुक्ति भी हो चुकी हो सकती है।

पुलिस के अनुसार मामले की जांच अभी जारी है और गिरोह से जुड़े तीन अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। उनके पकड़े जाने के बाद इस पूरे फर्जीवाड़े की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

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