रायबरेली में बुधवार को पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य पर उस वक्त हमला हुआ जब उनके समर्थक उनका स्वागत कर रहे थे। शहर के साथस मोटल चौराहा पर चल रहे इस कार्यक्रम के दौरान दो युवकों ने अचानक स्वामी प्रसाद के साथ मारपीट शुरू कर दी। जवाब में उनके समर्थकों ने दोनों युवकों को पकड़कर पिटाई की और पुलिस के हवाले कर दिया।

घटना के बाद मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दोनों युवकों को हिरासत में ले लिया गया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। सीओ सदर अमित सिंह के अनुसार, फिलहाल हमलावरों की पहचान नहीं हो सकी है। जैसे ही तहरीर प्राप्त होगी, विधिवत मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह हमला तथाकथित करणी सेना के नाम पर सक्रिय कुछ तत्वों द्वारा किया गया है, जिन्हें उन्होंने “कीड़े-मकोड़े” बताया। उन्होंने कहा कि यह घटना इस बात का प्रमाण है कि योगी सरकार में कानून-व्यवस्था की हालत कितनी बदतर हो चुकी है और अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं।
वहीं, पुलिस हिरासत में लिए गए एक हमलावर ने कहा कि उसने यह हमला इसलिए किया क्योंकि स्वामी प्रसाद मौर्य “लगातार सनातन धर्म का विरोध कर रहे हैं”, जो उसे अस्वीकार्य है।
पूर्व मंत्री अक्सर अपने विवादित बयानों के कारण सुर्खियों में रहते हैं। रायबरेली आगमन पर उनके कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया था, लेकिन इसी दौरान हुई इस घटना ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया।
इस हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि यह हमला निंदनीय और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति को हिंसा नहीं, बल्कि संवाद और बहस के जरिए हल किया जाना चाहिए। यह हमला केवल एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि राजनीतिक मर्यादा और लोकतंत्र की भावना पर सीधी चोट है। उन्होंने यूपी पुलिस से मांग की कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हमलावरों के पीछे कोई संगठित साजिश थी या यह व्यक्तिगत नाराज़गी का नतीजा।














