कांग्रेस सांसद ने अयोध्या आंदोलन, 1992 की घटना और भाजपा की राजनीति पर उठाए सवाल

नई दिल्ली। राम मंदिर चंदा मामले को लेकर कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान भाजपा का उद्देश्य मंदिर निर्माण नहीं, बल्कि राम मंदिर के मुद्दे को राजनीतिक रूप से जीवित रखना था।
प्रमोद तिवारी ने कहा कि जब उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी थी, तब उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से पूछा था कि अब जब सरकार बन गई है तो राम मंदिर का निर्माण कब होगा। उनके अनुसार, भाजपा उस समय मंदिर निर्माण के बजाय इस मुद्दे को बनाए रखना चाहती थी।
उन्होंने अपने बयान में वर्ष 1992 की घटना का भी उल्लेख करते हुए कहा कि 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा भंग कर दी गई थी। इसके बाद वर्ष 1993 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा की सीटों की संख्या 235 से घटकर 175 रह गई थी।
कांग्रेस सांसद ने दावा किया कि उस दौर की घटनाएं इस बात का उदाहरण हैं कि धार्मिक मुद्दों का राजनीतिक इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि जनता इन घटनाओं को भूली नहीं है और इतिहास आज भी सबके सामने है।
प्रमोद तिवारी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब राम मंदिर चंदा मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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