बब्बू शाह की याचिका पर लखनऊ बेंच की टिप्पणी; कोर्ट ने कहा- गैंग चार्ट महज औपचारिकता नहीं, आपराधिक इतिहास की जांच और अधिकारियों का स्वतंत्र विवेक जरूरी

लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई में अपनाई गई प्रक्रिया को लेकर बहराइच के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति मनीष माथुर की पीठ ने कहा कि गैंग चार्ट तैयार करना और उसे मंजूरी देना महज औपचारिक प्रक्रिया नहीं है। इसके लिए संबंधित व्यक्ति के आपराधिक इतिहास की समुचित जांच और अधिकारियों की ओर से स्वतंत्र रूप से विचार करना जरूरी है।
यह मामला बहराइच के पयागपुर थाने में बब्बू शाह के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत शुरू की गई कार्रवाई से जुड़ा था। शाह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अपने खिलाफ चल रही कार्यवाही को चुनौती दी थी। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद गैंग चार्ट से लेकर आगे की पूरी आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया।
SP और DM की भूमिका पर कोर्ट ने उठाए सवाल
अदालत ने पाया कि गैंग चार्ट को मंजूरी देते समय न तो पुलिस अधीक्षक और न ही जिलाधिकारी की ओर से यह दर्ज किया गया कि याचिकाकर्ता के आपराधिक इतिहास की उचित जांच की गई, कारणों पर विचार किया गया या दोनों अधिकारियों के बीच आवश्यक विचार-विमर्श हुआ।
रिकॉर्ड के मुताबिक, एसपी ने गैंग चार्ट को 11 नवंबर 2021 को मंजूरी दी थी, जबकि जिलाधिकारी ने इसे 15 नवंबर 2021 को मंजूरी दी। हाईकोर्ट ने कहा कि मंजूरी की यह प्रक्रिया आवश्यक आपसी विचार-विमर्श के अभाव की ओर संकेत करती है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि गैंगस्टर एक्ट जैसी कार्रवाई के गंभीर आपराधिक परिणाम हो सकते हैं। इसलिए चार्ट को मंजूरी देने वाले अधिकारी को स्वतंत्र विवेक का इस्तेमाल करते हुए अपनी संतुष्टि दर्ज करनी चाहिए।
गैंग चार्ट को औपचारिकता मानने पर आपत्ति
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि गैंग चार्ट केवल हस्ताक्षर कर आगे बढ़ाने वाली प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं हो सकती। इसमें संबंधित व्यक्ति के आपराधिक इतिहास और गैंगस्टर एक्ट लगाने के आधारों की गंभीरता से जांच आवश्यक है।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि संवैधानिक अदालतों के पुराने फैसलों में अधिकारियों के विवेक और निष्पक्षता को लेकर दिए गए निर्देशों के बावजूद वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली में इन पहलुओं का पर्याप्त पालन दिखाई नहीं दिया। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को संवैधानिक अदालतों द्वारा तय कानूनी सिद्धांतों का पालन करने और राज्य की कार्रवाई में निष्पक्षता बरतने का निर्देश दिया।
गैंग चार्ट से लेकर पूरी कार्यवाही रद्द
हाईकोर्ट ने 15 नवंबर 2021 के गैंग चार्ट, 19 फरवरी 2022 की चार्जशीट, 7 दिसंबर 2022 के संज्ञान और समन आदेश तथा बहराइच के पयागपुर थाने में दर्ज मामले से जुड़ी पूरी आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया।
अदालत का यह फैसला गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई शुरू करने से पहले पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा रिकॉर्ड की जांच, स्वतंत्र विचार और प्रक्रिया की निष्पक्षता की आवश्यकता पर केंद्रित है।
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