बरेली के मुस्लिम धर्मगुरु ने कहा- UCC पर सभी नागरिकों से राय-मशविरा होना चाहिए, एकतरफा तरीके से कानून लागू करने पर उठाए सवाल

बरेली: समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर देश में चल रही बहस के बीच ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने इसके मौजूदा प्रस्ताव को लेकर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि ऐसा कानून, जो उनके अनुसार शरीयत में हस्तक्षेप करता है, स्वीकार्य नहीं है।
रजवी ने कहा कि UCC को लेकर सभी नागरिकों से राय-मशविरा किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि अलग-अलग समुदायों की धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं को ध्यान में रखते हुए इस तरह के कानून पर व्यापक चर्चा जरूरी है। उन्होंने उन राज्यों में भी मुस्लिम समुदाय से पर्याप्त परामर्श नहीं किए जाने का दावा किया, जहां UCC से जुड़े प्रावधान लागू किए गए हैं।
शरीयत में दखल को लेकर आपत्ति
मौलाना रजवी के मुताबिक, मुस्लिम समुदाय का UCC को लेकर रुख पहले से स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े मामलों में शरीयत की मान्यताओं का ध्यान रखा जाना चाहिए। इसी आधार पर उन्होंने UCC को लेकर अपनी असहमति जाहिर की।
इससे पहले मार्च 2026 में भी रजवी ने UCC के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा था कि उनका विरोध शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से कानून के दायरे में किया जाएगा। उस समय उन्होंने आगे की रणनीति के लिए उलेमा और मुस्लिम बुद्धिजीवियों की बैठक की बात भी कही थी।
UCC पर देश में जारी है बहस
UCC का मुद्दा फिलहाल राजनीतिक दलों और विभिन्न सामाजिक-धार्मिक संगठनों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। हालिया बयानों में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2029 से पहले NDA शासित 21 राज्यों में UCC लागू करने की बात कही है। इसके बाद अलग-अलग संगठनों और धर्मगुरुओं की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
वहीं, UCC के समर्थक इसे अलग-अलग समुदायों के लिए व्यक्तिगत कानूनों की जगह समान नागरिक कानून की व्यवस्था के रूप में देखते हैं। दूसरी ओर, इसके विरोध में आवाज उठाने वाले संगठन धार्मिक और सांस्कृतिक प्रथाओं पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। मौलाना रजवी का ताजा बयान इसी व्यापक बहस का हिस्सा है।
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