फर्जी पॉलिसीधारकों के नाम पर बनाए गए थे पेमेंट वाउचर और चेक; तीन अन्य दोषियों को 3-3 साल की कठोर कैद

लखनऊ: भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की ट्रांसगोमती शाखा से जुड़े करीब 6.37 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े में लखनऊ की CBI अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने तत्कालीन हायर ग्रेड असिस्टेंट पंकज सक्सेना को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। मामले में दोषी ठहराए गए तीन अन्य निजी व्यक्तियों को तीन-तीन साल की कठोर कैद दी गई है।
अदालत ने पंकज सक्सेना पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। वहीं, प्रेम शंकर उपाध्याय, रेखा उपाध्याय और मनीष सक्सेना को तीन-तीन साल की कठोर कैद के साथ प्रत्येक पर 1.25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। अदालत ने 30 सितंबर 2026 को दोषसिद्धि के बाद सजा सुनाई।
फर्जी पॉलिसीधारकों के नाम पर तैयार हुए दस्तावेज
CBI के मुताबिक, यह फर्जीवाड़ा फरवरी 2006 से अगस्त 2010 के बीच किया गया। आरोप था कि आरोपियों ने आपसी साजिश के तहत फर्जी और अस्तित्वहीन पॉलिसीधारकों के नाम पर जाली पेमेंट वाउचर और चेक तैयार किए और इनके जरिए LIC की रकम को कथित तौर पर दूसरी जगह भेजा गया। इससे LIC को करीब ₹6,37,66,660 का वित्तीय नुकसान हुआ।
मामले में पंकज सक्सेना उस समय LIC की ट्रांसगोमती शाखा, जानकीपुरम में हायर ग्रेड असिस्टेंट के पद पर तैनात थे। तीन अन्य दोषी निजी व्यक्ति थे।
2012 में दर्ज हुआ था मामला
CBI ने LIC की ट्रांसगोमती शाखा के तत्कालीन चीफ मैनेजर की शिकायत के आधार पर 13 अगस्त 2012 को मामला दर्ज किया था। जांच पूरी होने के बाद CBI ने 21 अगस्त 2014 को आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
लंबी कानूनी प्रक्रिया और सुनवाई के बाद अदालत ने चारों आरोपियों को दोषी पाया और 30 सितंबर को सजा सुनाई।
किसे कितनी सजा?
| दोषी | सजा | जुर्माना |
|---|---|---|
| पंकज सक्सेना, तत्कालीन LIC हायर ग्रेड असिस्टेंट | 10 साल कठोर कारावास | ₹5 लाख |
| प्रेम शंकर उपाध्याय | 3 साल कठोर कारावास | ₹1.25 लाख |
| रेखा उपाध्याय | 3 साल कठोर कारावास | ₹1.25 लाख |
| मनीष सक्सेना | 3 साल कठोर कारावास | ₹1.25 लाख |
मामले में अदालत का फैसला सामने आने के बाद करीब 14 साल पहले दर्ज हुए इस वित्तीय धोखाधड़ी मामले की न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ है।
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