CM योगी का युवाओं को संदेश, सोशल मीडिया से थोड़ा दूर होकर किताबों से जुड़ें

मुख्यमंत्री ने कहा- अच्छी और उपयोगी किताबें युवाओं की सोच व ज्ञान को मजबूत करती हैं, पढ़ने की आदत को जीवन का हिस्सा बनाएं

लखनऊ: सोशल मीडिया और स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं से किताबों से जुड़ने और पढ़ने की आदत विकसित करने की अपील की है। मुख्यमंत्री का कहना है कि डिजिटल माध्यम उपयोगी होने के बावजूद युवाओं को पुस्तकों से मिलने वाले ज्ञान और विचारों की दुनिया से दूर नहीं होना चाहिए।

योगी आदित्यनाथ ने युवाओं तक अच्छी और उपयोगी किताबें पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया। उनका संदेश है कि पढ़ने की आदत केवल परीक्षा या पढ़ाई तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे जीवन का नियमित हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

सोशल मीडिया के दौर में पढ़ने की आदत पर जोर

आज युवा बड़ी मात्रा में समय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, शॉर्ट वीडियो और स्मार्टफोन पर बिताते हैं। ऐसे माहौल में किताबों की ओर युवाओं का ध्यान वापस लाना एक बड़ी चुनौती भी है।

मुख्यमंत्री ने इसी बदलाव के बीच युवाओं को किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित किया। इससे पहले भी अगस्त में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बच्चों से स्मार्टफोन का इस्तेमाल सीमित करने और अच्छी व प्रेरक किताबें पढ़ने की सलाह दी थी। उस दौरान उन्होंने कहा था कि तकनीक महत्वपूर्ण है, लेकिन किसी तकनीक पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता सोचने और समझने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है।

अच्छी किताबें सोच को देती हैं नई दिशा

किताबें केवल जानकारी हासिल करने का माध्यम नहीं हैं। नियमित पठन से अलग-अलग विषयों, विचारों और अनुभवों को समझने का अवसर मिलता है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री युवाओं को ऐसी किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं जो उनके ज्ञान, सोच और व्यक्तित्व के विकास में मदद कर सकें।

सितंबर की शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर भी योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा को केवल पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं रखने की बात कही थी। उन्होंने ज्ञान, संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास और जीवन को सही दिशा देने वाली समझ विकसित करने पर जोर दिया था।

लखनऊ में पुस्तक महोत्सव से भी जुड़ा संदेश

किताबों और पठन संस्कृति को बढ़ावा देने की यह चर्चा ऐसे समय में हो रही है, जब लखनऊ विश्वविद्यालय में गोमती पुस्तक महोत्सव 2026 का आयोजन किया जा रहा है। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (NBT), उत्तर प्रदेश सरकार और लखनऊ विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित यह महोत्सव 12 से 20 सितंबर तक चलेगा।

महोत्सव में करीब 250 पुस्तक स्टॉल और 121 प्रकाशकों की भागीदारी है। यहां हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, अवधी सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं की किताबें उपलब्ध होंगी। साहित्यिक चर्चाओं में युवा साहित्य, अनुवाद, विरासत, विज्ञान, अध्यात्म और समकालीन पत्रकारिता जैसे विषय भी शामिल किए गए हैं।

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डिजिटल दौर में किताबों की भूमिका

मुख्यमंत्री के संदेश का मूल विचार यह है कि तकनीक और किताबों को एक-दूसरे का विकल्प मानने के बजाय युवाओं को दोनों का संतुलित इस्तेमाल करना चाहिए। डिजिटल माध्यम से जानकारी तेजी से मिल सकती है, लेकिन गहन अध्ययन, लंबे समय तक किसी विषय पर ध्यान केंद्रित करने और अलग-अलग विचारों को समझने के लिए किताबों की भूमिका अब भी महत्वपूर्ण है।

उत्तर प्रदेश के सार्वजनिक पुस्तकालय तंत्र में भी पठन संस्कृति को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। राज्य के सार्वजनिक पुस्तकालय पोर्टल के अनुसार सरकारी पुस्तकालयों के संग्रह में लाखों किताबें उपलब्ध हैं और पाठकों को अलग-अलग विषयों की पुस्तकों तक पहुंच देने की व्यवस्था की गई है।

मुख्यमंत्री का युवाओं के लिए संदेश इसी दिशा में है कि सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया के बीच किताबों के लिए भी समय निकाला जाए। पढ़ने की आदत को केवल पढ़ाई की जरूरत नहीं, बल्कि ज्ञान और बेहतर सोच के विकास का माध्यम बनाया जाए।

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