आईआईएम रोड से पक्के पुल तक गोमती के बाएं तट पर प्रस्तावित परियोजना, जलभराव से राहत के साथ ग्रीन कॉरिडोर से जुड़ने की योजना

लखनऊ: फैजुल्लागंज क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए ₹182 करोड़ की लागत से बंधा निर्माण परियोजना प्रस्तावित की गई है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की ओर से इसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
प्रस्ताव के तहत गोमती नदी के बाएं तटबंध पर आईआईएम रोड से हार्डिंग ब्रिज यानी पक्के पुल तक बंधे का निर्माण किया जाना है। योजना को ग्रीन कॉरिडोर परियोजना से भी जोड़ने की तैयारी है। इसके तहत आईआईएम रोड से खदरा होते हुए पक्के पुल तक का क्षेत्र विकसित किया जाएगा।
जलभराव से प्रभावित इलाकों को राहत की उम्मीद
फैजुल्लागंज, दाउदनगर, मामा कॉलोनी समेत आसपास के इलाकों में गोमती का जलस्तर बढ़ने के दौरान जलभराव की समस्या सामने आती रही है। हाल की बारिश के बाद भी फैजुल्लागंज की कई कॉलोनियां जलभराव से प्रभावित हुईं। प्रशासन और नगर निगम ने राहत के लिए नावों और अस्थायी शिविरों की व्यवस्था की थी।
नगर आयुक्त गौरव कुमार ने भी बताया था कि फैजुल्लागंज क्षेत्र प्राकृतिक कैचमेंट की तरह काम करता है और स्थायी समाधान के लिए बंधे की जरूरत है। उनके मुताबिक, बंधे का निर्माण LDA की ग्रीन कॉरिडोर योजना का हिस्सा है।
ग्रीन कॉरिडोर से जुड़ेगा प्रस्तावित मार्ग
प्रस्तावित परियोजना सिर्फ जलभराव नियंत्रण तक सीमित नहीं है। योजना के तहत आईआईएम रोड से खदरा होते हुए पक्के पुल तक का क्षेत्र विकसित करने की बात कही गई है, जिससे इसे ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के नेटवर्क से जोड़ने में मदद मिलेगी।
ग्रीन कॉरिडोर का आईआईएम रोड से आगे पक्के पुल और समतामूलक चौराहे की दिशा में विस्तार पहले से परियोजना का हिस्सा रहा है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, IIM रोड से समतामूलक चौराहे तक करीब 13.5 किलोमीटर के हिस्से को जोड़ने वाला अंतिम महत्वपूर्ण लिंक भी पूरा होने के करीब है।
शासन की मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगा काम
LDA के प्रस्ताव के बाद अब परियोजना को शासन स्तर पर मंजूरी मिलने का इंतजार है। क्षेत्रीय विधायक डॉ. नीरज बोरा ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर प्रस्ताव पर जल्द आवश्यक कार्रवाई का आग्रह किया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद बंधे के निर्माण और संबंधित विकास कार्यों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
इस परियोजना से एक तरफ फैजुल्लागंज और आसपास के निचले इलाकों में गोमती के बढ़े जलस्तर से होने वाले जलभराव को नियंत्रित करने की उम्मीद है, वहीं दूसरी तरफ क्षेत्र को शहर की प्रमुख सड़क संपर्क परियोजनाओं से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
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