डॉक्टरों के संगठन ने समान गुणवत्ता वाली दवाओं के लिए एक समान मूल्य नीति और कुल व्यापारिक मार्जिन 30% तक सीमित करने की मांग उठाई। नकली व घटिया दवाओं की निगरानी मजबूत करने पर भी जोर दिया।

लखनऊ: दवाओं की कीमतों में अंतर और मरीजों पर बढ़ते इलाज के खर्च को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की लखनऊ शाखा ने एक समान मूल्य नीति लागू करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि समान गुणवत्ता वाली दवाओं की कीमतों में अनावश्यक अंतर को दूर करने के लिए ‘एक दवा, एक कीमत’ का सिद्धांत अपनाया जाना चाहिए। इसके साथ ही दवाओं की बिक्री से जुड़े कुल व्यापारिक मार्जिन को 30 प्रतिशत तक सीमित करने की मांग भी की गई है।
IMA लखनऊ ने यह मुद्दा ऐसे समय उठाया है, जब उत्तर प्रदेश में दवाओं के खरीद मूल्य और मरीजों को बेचे जाने वाले मूल्य के बीच अंतर को लेकर जांच और पारदर्शिता बढ़ाने की पहल चल रही है। संगठन के मुताबिक, दवाओं की कीमत तय करने की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिससे मरीजों को उचित दाम पर गुणवत्तापूर्ण दवाएं मिल सकें।
कीमतों में अंतर पर उठाए सवाल
IMA के अनुसार, दवाओं की कीमतों में अंतर के पीछे थोक खरीद, बाजार में प्रतिस्पर्धा, छूट, बैच में बदलाव और दवा की शेष उपयोग अवधि जैसे कई कारण हो सकते हैं। ऐसे में केवल कीमत के आधार पर किसी दवा की गुणवत्ता या असलियत का आकलन करना सही नहीं है।
संगठन का जोर इस बात पर है कि मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता के साथ गुणवत्ता की जांच भी सुनिश्चित की जाए, ताकि मरीजों को दवा खरीदते समय अनावश्यक आर्थिक बोझ न उठाना पड़े।
नकली और घटिया दवाओं की जांच मजबूत करने की मांग
IMA लखनऊ की सचिव डॉ. श्वेता श्रीवास्तव ने दवाओं की गुणवत्ता की निगरानी के लिए नियमित सैंपल जांच, बैच का सत्यापन और सप्लाई चेन की निगरानी मजबूत करने पर जोर दिया। इससे नकली, घटिया और एक्सपायरी दवाओं की पहचान करने के साथ गलत परिस्थितियों में रखी गई दवाओं पर भी नजर रखी जा सकेगी।
संगठन ने मेडिकल स्टोरों पर बिना वैध प्रिस्क्रिप्शन के बेची जाने वाली उन दवाओं पर कार्रवाई की मांग भी की, जिनके लिए डॉक्टर की पर्ची जरूरी है। साथ ही, पंजीकृत फार्मासिस्ट की निर्धारित भूमिका का पालन कराने और अनधिकृत तरीके से मरीजों की जांच या इलाज करने पर रोक लगाने की बात कही गई।
मरीजों के खर्च से जुड़ा है मुद्दा
दवाओं की कीमतों में पारदर्शिता और व्यापारिक मार्जिन पर नियंत्रण की मांग का सीधा संबंध मरीजों के इलाज के खर्च से है। खासकर लंबे समय तक दवा लेने वाले मरीजों और गंभीर बीमारियों के उपचार में दवाओं की कीमत का अंतर परिवारों के बजट पर असर डाल सकता है।
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि दवाओं की मूल्य नीति को लेकर संबंधित नियामक संस्थाएं क्या कदम उठाती हैं। फिलहाल IMA लखनऊ की मांग एक समान मूल्य व्यवस्था, बेहतर गुणवत्ता निगरानी और दवा बिक्री में पारदर्शिता पर केंद्रित है।
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