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LPG Crisis in Lucknow: गैस किल्लत से छोटे वेंडर्स पर मार, काम छोड़ गांव लौटने को मजबूर

ईरान संकट के चलते पैदा हुई एलपीजी किल्लत का असर अब राजधानी Lucknow में साफ दिखाई देने लगा है। गैस की कमी और बढ़ती कीमतों ने छोटे वेंडर्स और प्रवासी मजदूरों की कमर तोड़ दी है, जिससे कई लोग अपना काम-धंधा छोड़कर गांव लौटने को मजबूर हो गए हैं।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि हालात कोरोना काल के लॉकडाउन जैसे नजर आने लगे हैं। छोटे दुकानदारों का कहना है कि उन्हें समय पर गैस नहीं मिल रही, और ब्लैक में मिलने वाली गैस बेहद महंगी है, जिससे दुकान चलाना मुश्किल हो गया है।

Hazratganj में चाय-नाश्ते की ठेली लगाने वाले आजमगढ़ के राकेश मौर्य बताते हैं कि कमाई घट गई है, जबकि गैस पर खर्च लगातार बढ़ रहा है। वहीं Indira Nagar में फास्ट फूड कार्ट चलाने वाले बस्ती के अरविंद मिश्रा का कहना है कि उन्हें 10 दिनों से सिलेंडर नहीं मिला, जिससे काम पूरी तरह ठप हो गया है।

Nishatganj में चाट बेचने वाले राहुल वर्मा कहते हैं कि एलपीजी ब्लैक में दोगुनी कीमत पर मिल रही है, ऐसे में गांव लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। कुछ लोगों ने इंडक्शन का सहारा लिया, लेकिन उसकी धीमी गति के कारण ग्राहक इंतजार नहीं करते और व्यापार प्रभावित हो रहा है।

Gomti Nagar और Chowk जैसे इलाकों में भी हालात यही हैं। कबाब और पराठा बेचने वाले विक्रेताओं का कहना है कि गैस खत्म होने पर उन्होंने लकड़ी जलाकर खाना बनाने की कोशिश की, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसकी भी अनुमति नहीं मिली।

इस संकट का असर दिहाड़ी मजदूरों पर भी पड़ा है। Transport Nagar, Talkatora और Chinhat जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों का कहना है कि नौकरी होने के बावजूद महंगी गैस के कारण गुजारा मुश्किल हो गया है।

Sarojini Nagar और Amausi की छोटी इकाइयों में काम करने वाले मजदूर भी अब शहर छोड़ने लगे हैं। कई लोगों ने बताया कि सिलेंडर की सप्लाई अनियमित है और कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा है।

कुल मिलाकर एलपीजी संकट ने राजधानी में छोटे कारोबारियों और प्रवासी मजदूरों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है, जिससे शहर में एक बार फिर पलायन जैसे हालात बनते नजर आ रहे हैं।

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