मुफ्त बस यात्रा से लेकर ₹40 हजार सालाना सहायता तक, 2027 से पहले महिलाओं को साधने की होड़ तेज

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले महिला मतदाताओं को लेकर सियासी मुकाबला तेज होता दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा समेत कई घोषणाएं की हैं, वहीं समाजवादी पार्टी ने भी महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता देने सहित कई बड़े वादे सामने रखे हैं।
योगी सरकार ने 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा शुरू करने की घोषणा की है। इसके अलावा रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं और उनके एक सहयात्री को भी निर्धारित अवधि में निशुल्क बस यात्रा की सुविधा दी जा रही है। सरकार इसे महिलाओं की सुविधा और सशक्तिकरण से जोड़कर पेश कर रही है।
सपा ने आर्थिक मदद को बनाया बड़ा मुद्दा
इसके जवाब में समाजवादी पार्टी की ओर से महिलाओं के लिए ‘स्त्री सम्मान समृद्धि योजना’ का प्रस्ताव सामने रखा गया है। पार्टी की ओर से सरकार बनने पर महिलाओं को सालाना 40 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की बात कही गई है।
इसके साथ ही छात्राओं को लैपटॉप और साइकिल जैसी सुविधाएं देने तथा महिलाओं के लिए अलग एंबुलेंस सेवा शुरू करने के वादे भी किए गए हैं। सपा की रणनीति में महिलाओं की आर्थिक स्थिति, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को प्रमुख मुद्दा बनाया जा रहा है।
घोषणाओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी तेज
महिलाओं से जुड़ी घोषणाओं के साथ दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी बढ़ गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर महिलाओं के अधिकारों को लेकर निशाना साधा है। वहीं सपा इन घोषणाओं को महिला सशक्तिकरण और आर्थिक सुरक्षा से जोड़कर सरकार के सामने अपना विकल्प पेश कर रही है।
ऐसे में महिला केंद्रित योजनाएं अब केवल कल्याणकारी घोषणाओं तक सीमित नहीं दिख रही हैं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव की राजनीतिक रणनीति का अहम हिस्सा बनती नजर आ रही हैं।
महिला वोटरों पर क्यों है इतनी नजर?
उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में महिला मतदाता हैं और पिछले कुछ चुनावों में महिला लाभार्थी वर्ग राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण रहा है। यही वजह है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी योजनाएं और वादे सामने रख रहे हैं।
आने वाले महीनों में महिलाओं के लिए और घोषणाएं सामने आती हैं या नहीं, इस पर भी राजनीतिक नजरें रहेंगी। फिलहाल मुफ्त यात्रा बनाम सीधे आर्थिक लाभ के मॉडल ने यूपी की चुनावी राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है।
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