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यूपी-राजस्थान के स्कूलों में वीडियो बैन पर सुप्रीम कोर्ट पहुंची याचिका

बिना अनुमति बाहरी लोगों, पत्रकारों और यूट्यूबर्स की एंट्री व फोटो-वीडियोग्राफी पर रोक को चुनौती; आदेशों को मौलिक अधिकारों के खिलाफ बताया गया

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश और राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश और बिना अनुमति फोटो-वीडियोग्राफी पर लगाए गए प्रतिबंध अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। वकील नरेंद्र मिश्रा ने जनहित याचिका दाखिल कर दोनों राज्यों के संबंधित सर्कुलर को रद्द करने की मांग की है।

मामले में दाखिल याचिका के मुताबिक, दोनों राज्यों में स्कूल परिसरों में पत्रकारों, यूट्यूबर्स, सोशल मीडिया से जुड़े लोगों और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों के बिना अनुमति प्रवेश पर रोक लगाई गई है। इसके साथ ही फोटो, वीडियो, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग जैसी गतिविधियों के लिए भी पूर्व अनुमति की व्यवस्था की गई है।

उत्तर प्रदेश में हाल के दिनों में अयोध्या, बलिया, बलरामपुर समेत कई जिलों में ऐसे निर्देश जारी किए गए हैं। अयोध्या में 19 अगस्त को जारी आदेश के तहत बाहरी लोगों और सोशल मीडिया से जुड़े व्यक्तियों को सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना स्कूल परिसर में प्रवेश और फोटो-वीडियोग्राफी की अनुमति नहीं है।

राजस्थान में भी सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों की आवाजाही और बिना अनुमति रिकॉर्डिंग पर रोक लगाई गई है। राज्य के 16 अगस्त के निर्देशों में फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग के लिए पूर्व अनुमति को जरूरी किया गया है।

याचिका में क्या तर्क दिया गया?

याचिकाकर्ता ने इन प्रतिबंधों को संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(a), 19(1)(g), 21 और 21-A के खिलाफ बताया है। याचिका में विशेष रूप से ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ और ‘प्रेस की स्वतंत्रता’ से जुड़े अधिकारों का हवाला दिया गया है।

याचिका का तर्क है कि सरकारी स्कूल सार्वजनिक संस्थान हैं और उनकी व्यवस्थाओं, सुविधाओं तथा कमियों के बारे में जानकारी सामने आना पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए जरूरी है। याचिकाकर्ता के अनुसार, स्कूलों में बाहरी लोगों की पहुंच को पूरी तरह प्रतिबंधित करने से ऐसी स्थितियों की स्वतंत्र निगरानी प्रभावित हो सकती है।

वहीं, राज्य सरकारों की ओर से ऐसे प्रतिबंधों के पीछे छात्रों की सुरक्षा, निजता और स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बनाए रखने जैसे कारण बताए गए हैं। राजस्थान के आदेश में छात्रों की निजता और गरिमा की सुरक्षा का भी उल्लेख किया गया है।

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