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दिल्ली में ‘संसद चलो’ मार्च पर पुलिस एक्शन, छात्रों ने लगाए गंभीर आरोप

छात्र छात्रों पर लाठीचार्ज | ‘संसद चलो’ मार्च

नई दिल्ली। 21 जुलाई को आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। देशभर से दिल्ली पहुंचे छात्रों ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने अत्यधिक बल प्रयोग किया, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं घायल हुए हैं। कई घायल छात्रों का विभिन्न अस्पतालों में उपचार चल रहा है।

प्रदर्शन में शामिल छात्रों का कहना है कि मार्च के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। छात्रों के अनुसार, कई प्रदर्शनकारियों के सिर पर गंभीर चोटें आईं, जबकि कुछ को मौके से अस्पताल ले जाना पड़ा। सोशल मीडिया और विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित वीडियो में भी कई छात्र घायल अवस्था में दिखाई दे रहे हैं।

कुछ छात्राओं ने आरोप लगाया है कि कार्रवाई के दौरान धक्का-मुक्की और अफरा-तफरी के बीच उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ और उनके कपड़े फट गए। वहीं, कई छात्रों का दावा है कि घायल होने के बाद भी उनके साथ बल प्रयोग जारी रहा। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन घटना से जुड़े वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान लगातार सामने आ रहे हैं।

छात्र संगठनों का कहना है कि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर संसद तक शांतिपूर्ण मार्च कर रहे थे। उनका आरोप है कि प्रदर्शनकारियों के साथ ऐसा व्यवहार किया गया मानो वे किसी गंभीर आपराधिक गतिविधि में शामिल हों। घटना के बाद कई छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों ने पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, भीड़ नियंत्रण से जुड़े दिशा-निर्देशों में बल प्रयोग को न्यूनतम रखने और शरीर के संवेदनशील हिस्सों, विशेषकर सिर और ऊपरी धड़, पर प्रहार से बचने की सलाह दी जाती है। ऐसे में मार्च के दौरान घायल हुए छात्रों की तस्वीरों और वीडियो ने पुलिस कार्रवाई की प्रकृति को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना के बाद युवाओं और छात्र संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि युवाओं की आवाज सुनने के बजाय उन पर बल प्रयोग किया गया, जबकि सरकार और प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हुई यह कार्रवाई अब राष्ट्रीय स्तर पर बहस का विषय बन गई है।

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