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9.12 लाख करोड़ का बजट पेश, 6 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर; प्रति व्यक्ति आय 1.20 लाख पहुंचने का अनुमान

उत्तर प्रदेश विधानसभा में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने वित्त वर्ष 2025-26 का बजट पेश किया। इस बार बजट का कुल आकार 9,12,696 करोड़ रुपये रखा गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12 प्रतिशत अधिक है। सरकार ने दावा किया है कि प्रदेश के लगभग 6 करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी से ऊपर उठाने में सफलता मिली है।

वित्त मंत्री ने बताया कि वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) में प्रदेश की जीएसडीपी 30.25 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 13.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 1,09,844 रुपये आंकी गई है, जो वर्ष 2016-17 के 54,564 रुपये से दोगुने से अधिक है। वर्ष 2025-26 में प्रति व्यक्ति आय 1,20,000 रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। राज्य में बेरोजगारी दर घटकर 2.24 प्रतिशत रह गई है। एसडीजी इंडिया इंडेक्स में प्रदेश की रैंकिंग 2018-19 में 29वें स्थान से सुधरकर 2023-24 में 18वें स्थान पर पहुंच गई है।

कृषि, उद्योग और निवेश पर जोर

सरकार के अनुसार, उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन में देश में पहले स्थान पर है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत लाखों किसानों को लाभ दिया गया है और रिकॉर्ड गन्ना भुगतान किया गया है। विश्व बैंक सहायता प्राप्त यूपी एग्रीज परियोजना के अंतर्गत एग्री-एक्सपोर्ट हब स्थापित किए जाएंगे।

फरवरी 2024 में आयोजित चौथे ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में अब तक लगभग 50 लाख करोड़ रुपये के एमओयू हस्ताक्षरित किए जा चुके हैं, जिनसे करीब 10 लाख रोजगार सृजन की संभावना जताई गई है। इनमें से लगभग 15 लाख करोड़ रुपये के निवेश से जुड़ी 16 हजार से अधिक परियोजनाओं के चार ग्राउंड ब्रेकिंग समारोह संपन्न हो चुके हैं।

मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स हब के रूप में यूपी

सरकार ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा मोबाइल फोन विनिर्माण केंद्र बन चुका है, जहां देश के कुल मोबाइल उत्पादन का 65 प्रतिशत उत्पादन होता है। भारत की 55 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट इकाइयां प्रदेश में स्थित हैं और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 44,744 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। स्टार्टअप को बढ़ावा देने के प्रयासों के चलते उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय स्टार्टअप रैंकिंग में ‘लीडर श्रेणी’ का दर्जा मिला है।

रोजगार और कौशल विकास पर फोकस

सरकार ने युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण और कौशल संवर्धन मिशन मोड में चलाने की घोषणा की है। कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्रों की क्षमता बढ़ाई जाएगी और नए केंद्र स्थापित किए जाएंगे। पीपीपी मॉडल के तहत जॉब प्लेसमेंट और कौशल केंद्र विभिन्न जिलों में खोले जाएंगे। महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए अलग से केंद्र स्थापित करने की भी योजना है।

सरकार का कहना है कि पूंजी निवेश और आधारभूत ढांचे के विकास के साथ-साथ युवाओं को रोजगार के लिए सक्षम बनाना उसकी प्राथमिकता है, ताकि प्रदेश का समग्र और समावेशी विकास सुनिश्चित किया जा सके।

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