चमोली और बागेश्वर के प्रत्याशियों पर गिरी गाज; पंचायत चुनाव के खर्च का हिसाब नहीं देने पर लिया गया बड़ा फैसला।

देहरादून। उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में चुनावी खर्च का विवरण प्रस्तुत नहीं करने वाले 1452 प्रत्याशियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उन पर तीन वर्ष तक चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया है। आयोग के अनुसार, संबंधित प्रत्याशियों को कई बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन निर्धारित समय के भीतर किसी प्रकार का जवाब या व्यय विवरण प्रस्तुत नहीं किया गया।
राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार ने बताया कि कार्रवाई से प्रभावित प्रत्याशियों में चमोली जिले के 826 और बागेश्वर जिले के 626 प्रत्याशी शामिल हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि चुनावी खर्च का विवरण देना प्रत्येक प्रत्याशी की कानूनी जिम्मेदारी है और इसका पालन न करने पर यह कार्रवाई की गई है।
पिछले वर्ष हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में प्रदेशभर में 60 हजार से अधिक उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था। हालांकि बड़ी संख्या में प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो गए थे, जबकि लगभग 32,580 प्रत्याशियों के बीच मतदान हुआ था।
आज होगी कैबिनेट बैठक, कई प्रस्तावों पर लग सकती है मुहर
उत्तराखंड सचिवालय में शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक आयोजित होगी। बैठक में उपनल एवं संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण से संबंधित कैबिनेट उपसमिति की रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। इसके अलावा कार्मिक, शिक्षा, कृषि, पर्यटन और आवास विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी चर्चा और निर्णय संभव है।
दिल्ली दौरे पर सीएम धामी ने भाजपा नेताओं से की मुलाकात
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को दिल्ली में भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा के साथ क्षेत्रीय विकास और सड़क परियोजनाओं पर चर्चा हुई। इसके अलावा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, सांसद अजय भट्ट, माला राज्यलक्ष्मी शाह और कल्पना सैनी से भी उन्होंने भेंट की।
कांग्रेस पर पूर्व सैनिकों के अपमान का आरोप
पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार परिषद के अध्यक्ष कर्नल अजय कोठियाल (सेवानिवृत्त) ने कांग्रेस पर पूर्व सैनिकों की उपेक्षा का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अग्निवीर योजना को लेकर आयोजित कांग्रेस की पत्रकार वार्ता में किसी भी पूर्व सैनिक को मंच पर स्थान नहीं दिया गया और पूरा कार्यक्रम केवल पार्टी नेताओं तक सीमित रहा।
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