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सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पहले बनभूलपुरा में हाई अलर्ट, 300 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात

रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में आज अहम आदेश की उम्मीद; इलाके को सुपर जोन में बांटा गया, ड्रोन और अतिरिक्त सुरक्षा बलों से निगरानी

हल्द्वानी: उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित बनभूलपुरा में रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले को लेकर बुधवार को सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सुप्रीम कोर्ट में मामले की अंतिम सुनवाई के बाद आज आदेश आने की संभावना के मद्देनजर पुलिस और प्रशासन ने इलाके में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकना है।

नैनीताल के एसएसपी मंजूनाथ टीसी ने बताया कि रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में अंतिम सुनवाई के बाद निर्णय के लिए आज की तारीख तय है। उन्होंने कहा कि करीब दो साल पहले एक छोटे अतिक्रमण को हटाने के दौरान क्षेत्र में हिंसा की घटना हुई थी। इसी पृष्ठभूमि में एहतियात के तौर पर पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई है।

एसएसपी के मुताबिक, क्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारियों समेत 300 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा पीएसी की दो कंपनियां भी लगाई गई हैं। पूरे इलाके को अलग-अलग सेक्टर, जोन और सुपर जोन में बांटकर सुरक्षा व्यवस्था की गई है। बनभूलपुरा में सड़कों के साथ-साथ संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाई गई है और ड्रोन के जरिए भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है। सुरक्षा एजेंसियां सोशल मीडिया और इलाके की गतिविधियों पर भी नजर रख रही हैं, ताकि किसी तरह की भड़काऊ या गलत सूचना से तनाव की स्थिति पैदा न हो।

क्या है बनभूलपुरा रेलवे भूमि विवाद?

यह विवाद हल्द्वानी रेलवे स्टेशन के आसपास करीब 29 एकड़ रेलवे भूमि पर कथित अतिक्रमण से जुड़ा है। मामले में बड़ी संख्या में परिवारों के प्रभावित होने की आशंका जताई जाती रही है। रेलवे और राज्य सरकार की ओर से भूमि को रेलवे की संपत्ति बताया गया है, जबकि प्रभावित पक्षों की ओर से लंबे समय से भूमि और पुनर्वास समेत कई मुद्दे अदालत के समक्ष उठाए गए हैं।

दिसंबर 2022 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रेलवे भूमि से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और जनवरी 2023 में शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए रेलवे और राज्य सरकार से जवाब मांगा था।

जुलाई 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के मुद्दे पर भी राज्य सरकार के मुख्य सचिव को संबंधित पक्षों के साथ बैठक करने के निर्देश दिए थे। अदालत ने इस मामले में मानवीय पहलू और पुनर्वास की जरूरत पर जोर दिया था।

अब अंतिम सुनवाई के बाद आज शीर्ष अदालत के आदेश पर सभी की नजर है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने बनभूलपुरा में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के अंतिम आदेश के आधिकारिक रूप से सामने आने तक यह कहना जल्दबाजी होगी कि भूमि खाली कराने या किसी अन्य कार्रवाई को लेकर अदालत ने क्या निर्देश दिए हैं।

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