एसडीएम कार्यालय पहुंचकर संगठन ने धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं का हवाला दिया, सरकार से नीति बनाने की मांग

हल्द्वानी में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर एक संगठन ने विरोध दर्ज कराया है। पहाड़ी आर्मी के कार्यकर्ताओं ने एसडीएम कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और उत्तराखंड में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन पर रोक लगाने की मांग रखी।
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के सामने अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं रखते हुए कहा कि उत्तराखंड को देवभूमि के रूप में देखा जाता है और भगवान गणेश से जुड़ी स्थानीय आस्थाओं को देखते हुए प्रतिमा विसर्जन की परंपरा पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
सरकार से रोक लगाने की मांग
संगठन की ओर से प्रशासन के माध्यम से सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने की बात कही गई। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि उत्तराखंड में भगवान गणेश की पूजा और उनसे जुड़ी धार्मिक परंपराओं का विशेष महत्व है। ऐसे में बाहरी प्रभाव वाली विसर्जन परंपराओं के बजाय स्थानीय धार्मिक मान्यताओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
हालांकि, यह मांग फिलहाल संगठन की ओर से उठाई गई है। उत्तराखंड सरकार की ओर से प्रदेश में गणेश विसर्जन पर प्रतिबंध लगाने का कोई आदेश सामने नहीं आया है।
धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का मुद्दा
गणेश उत्सव के दौरान प्रतिमा स्थापना और विसर्जन देश के कई हिस्सों में प्रचलित धार्मिक परंपरा है। उत्तराखंड में इस पर रोक की मांग के पीछे प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय संस्कृति और देवभूमि की धार्मिक पहचान को प्रमुख आधार बनाया है।
यह मुद्दा इससे पहले भी हल्द्वानी में उठ चुका है। अगस्त 2025 में पहाड़ी आर्मी ने सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर गणेश प्रतिमा विसर्जन पर रोक की मांग की थी। उस समय संगठन ने उत्तराखंड की धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान का हवाला दिया था।
प्रशासन के फैसले पर नजर
फिलहाल गणेश विसर्जन को लेकर संगठन की मांग और प्रशासन के सामने रखे गए तर्क ही सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं। सरकार या प्रशासन की ओर से इस मांग पर क्या निर्णय लिया जाता है, यह आगे स्पष्ट होगा।
ऐसे में मौजूदा स्थिति को गणेश विसर्जन पर प्रतिबंध के फैसले के तौर पर नहीं, बल्कि रोक की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के रूप में देखा जाना चाहिए।
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