इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खराब और अधूरी जांच पर जताई नाराजगी, DGP राजीव कृष्ण ने अनुपालन का दिया भरोसा

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली और जांच की गुणवत्ता को लेकर सख्त टिप्पणी की है। मंगलवार को उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश हुए। न्यायमूर्ति समीर जैन की एकलपीठ ने उन्हें यह स्पष्ट करने के लिए तलब किया था कि पुलिस अधिकारी अदालत के आदेशों का समय पर पालन करने में क्यों हिचक रहे हैं।
महोबा के हत्या मामले से शुरू हुआ मामला
यह पूरा मामला महोबा में दर्ज हत्या के मुकदमे में आरोपी पुष्पराज सिंह उर्फ बबलू की जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। कोर्ट ने 16 जुलाई 2026 को राज्य सरकार से घटना के कथित समय और 21 जून 2025 की CCTV फुटेज में दर्ज समय के बीच अंतर को लेकर विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा था। निर्धारित समय तक जवाब दाखिल नहीं होने पर कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
अदालत को बताया गया था कि सरकारी अधिवक्ता की ओर से संबंधित अधिकारियों को दो बार पत्र भेजे गए, लेकिन इसके बावजूद जरूरी जवाब और रिकॉर्ड समय पर कोर्ट के सामने नहीं पहुंच सके। इसके बाद हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों के रवैये को गंभीरता से लेते हुए DGP को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया था।
‘सजा दर नहीं, जांच की गुणवत्ता चिंता’
सुनवाई के दौरान DGP राजीव कृष्ण ने पुलिस की सजा दर (conviction rate) का हवाला दिया। इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसकी चिंता सजा दर नहीं, बल्कि खराब और अधूरी जांच को लेकर है। कोर्ट ने पुलिस जांच में रिकॉर्ड उपलब्ध कराने, CCTV जैसे साक्ष्यों और अदालत के निर्देशों के समय पर अनुपालन को लेकर गंभीर चिंता जताई।
पीठ ने यह भी कहा कि मामला सिर्फ एक मुकदमे तक सीमित नहीं है। अदालत के सामने ऐसे कई मामले आ रहे हैं, जहां आदेशों का समय पर पालन नहीं होता और जांच की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में रहती है।
व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मामलों में तीन दिन की समयसीमा
हाईकोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में पुलिस से निर्देश और जरूरी रिकॉर्ड मंगाने की प्रक्रिया पर भी जोर दिया। अदालत ने कहा कि पहले पुलिस से निर्देश लेने के लिए 10 दिन तक का समय दिया जाता था, लेकिन अब ऐसे मामलों में तीन दिन में जरूरी निर्देश उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर ध्यान देना होगा।
DGP ने दिया व्यवस्था सुधारने का भरोसा
DGP राजीव कृष्ण ने अदालत को भरोसा दिलाया कि भविष्य में अदालती आदेशों का समयबद्ध तरीके से अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा और जवाब दाखिल करने में अनावश्यक देरी नहीं होगी। उन्होंने संबंधित मामलों की निगरानी के लिए गठित समितियों और उनके कामकाज का भी उल्लेख किया।
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