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धामी ने कहा- उत्तराखंड के 27 उत्पादों को मिला GI टैग, आखिर कौन-से हैं ये उत्पाद? जानिए क्यों है इनकी खास पहचान

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक पहचान दिलाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड के 27 उत्पादों को जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग मिल चुका है, जिससे स्थानीय किसानों, कारीगरों और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को बेहतर बाजार, उचित मूल्य और रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।

Uttarakhand GI tags
उत्तराखंड के 27 उत्पादों को मिला GI टैग

लेकिन सवाल यह है कि GI टैग क्या होता है, यह क्यों महत्वपूर्ण है और उत्तराखंड के वे 27 उत्पाद कौन-कौन से हैं? आइए विस्तार से जानते हैं।

क्या होता है GI टैग?

GI (Geographical Indication) टैग किसी ऐसे उत्पाद को दिया जाता है जिसकी गुणवत्ता, पहचान या विशेषता किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ी होती है। भारत में यह टैग Geographical Indications of Goods (Registration and Protection) Act, 1999 के तहत दिया जाता है।

उदाहरण के लिए, दार्जिलिंग चाय, बनारसी साड़ी या कश्मीर केसर की तरह ही उत्तराखंड के कई उत्पादों को भी उनकी विशिष्टता के कारण GI टैग मिला है।

GI टैग मिलने के फायदे

  • उत्पाद की असली पहचान सुरक्षित रहती है।
  • नकली उत्पादों पर रोक लगाने में मदद मिलती है।
  • किसानों और कारीगरों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ती है।
  • राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान मिलती है।
  • स्थानीय कला, संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण होता है।

उत्तराखंड को कब मिले 27 GI टैग?

उत्तराखंड को शुरुआत में 9 उत्पादों के लिए GI टैग मिले थे। इसके बाद 2023 में राज्य को एक साथ 18 नए GI टैग प्राप्त हुए। इसके साथ ही राज्य के कुल GI टैग वाले उत्पादों की संख्या 27 हो गई। उस समय यह भी रिकॉर्ड बना कि उत्तराखंड एक साथ 18 GI प्रमाणपत्र प्राप्त करने वाला पहला राज्य बना।

उत्तराखंड के 27 GI टैग वाले उत्पाद

वर्ष 2016

  • उत्तराखंड तेजपत्ता (Tejpat)

वर्ष 2021–2022

  • देहरादून बासमती चावल
  • मुनस्यारी सफेद राजमा
  • ऐपण कला
  • रिंगाल शिल्प
  • थुलमा
  • भोटिया दान
  • च्यूरा तेल
  • ताम्टा शिल्प (कॉपर क्राफ्ट)

वर्ष 2023 में मिले 18 नए GI टैग

कृषि उत्पाद

  • चौलाई (रामदाना)
  • झंगोरा
  • मंडुवा
  • लाल चावल
  • अल्मोड़ा लखौरी मिर्च
  • बेरीनाग चाय
  • रामनगर लीची
  • रामगढ़ आड़ू
  • माल्टा
  • पहाड़ी अरहर
  • गहत
  • काला भट्ट

हस्तशिल्प

  • बिच्छू बूटी फैब्रिक
  • रंगवाली पिछौड़ा
  • चमोली वुडन राम्माण मास्क
  • उत्तराखंड लिखाई (वुड कार्विंग)

खाद्य उत्पाद

  • बुरांश

निर्मित उत्पाद

  • नैनीताल मोमबत्ती

मुख्यमंत्री धामी ने अभी यह बात क्यों उठाई?

मुख्यमंत्री धामी की पोस्ट किसी नए GI टैग की घोषणा नहीं है। दरअसल, राज्य सरकार इन GI टैग वाले उत्पादों को ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ (House of Himalayas) ब्रांड के माध्यम से देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचाने पर काम कर रही है। सरकार का उद्देश्य इन पारंपरिक उत्पादों को “लोकल टू ग्लोबल” पहचान दिलाना, किसानों और स्वयं सहायता समूहों की आय बढ़ाना तथा उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को आर्थिक शक्ति में बदलना है। इसी संदर्भ में मुख्यमंत्री ने 27 GI टैग वाले उत्पादों का उल्लेख किया।

क्यों महत्वपूर्ण है यह उपलब्धि?

विशेषज्ञों का मानना है कि GI टैग केवल एक प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि किसी क्षेत्र की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान का संरक्षण है। इससे स्थानीय उत्पादों की ब्रांड वैल्यू बढ़ती है, निर्यात के अवसर खुलते हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए यह पहल स्थानीय किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों और पारंपरिक कारीगरों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

Also Read: यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हुआ सारनाथ: उत्तर प्रदेश और भारत की सांस्कृतिक विरासत को मिली वैश्विक पहचान

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