फाइनल रिपोर्ट पर वर्षों तक फैसला न होने पर हाईकोर्ट गंभीर, प्रदेश की सभी अदालतों से मांगा पूरा ब्योरा

लखनऊ | विधिक संवाददाता, शुभांकर भानू
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने प्रदेश की अधीनस्थ अदालतों में फाइनल रिपोर्ट (एफआर) के लंबे समय तक लंबित रहने के मामलों पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि यदि पुलिस जांच पूरी कर रिपोर्ट दाखिल कर चुकी है, तो उस पर समय पर न्यायिक निर्णय होना भी उतना ही आवश्यक है। वर्षों तक मामलों का लंबित रहना न्याय प्रक्रिया की गति पर सवाल खड़ा करता है।
इसी को देखते हुए हाईकोर्ट ने प्रदेश के सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को निर्देश दिया है कि वे 20 अगस्त तक अपने-अपने जिलों की अदालतों में लंबित फाइनल रिपोर्टों का विस्तृत विवरण न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करें।
लखनऊ में ही करीब 50 हजार फाइनल रिपोर्ट लंबित
न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी की एकल पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि केवल लखनऊ की अधीनस्थ अदालतों में ही लगभग 50 हजार फाइनल रिपोर्टें अंतिम आदेश का इंतजार कर रही हैं। इस जानकारी पर अदालत ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि इतने बड़े स्तर पर मामलों का लंबित रहना गंभीर विषय है।
हाईकोर्ट ने पूछा, देरी क्यों हो रही है?
अदालत ने सभी जिला जजों से यह बताने को कहा है कि—
- उनके जिले में कितनी फाइनल रिपोर्टें लंबित हैं।
- मामलों के निस्तारण में देरी के मुख्य कारण क्या हैं।
- लंबित मामलों को खत्म करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
- भविष्य में इन्हें समयबद्ध तरीके से निपटाने की क्या योजना है।
इन सभी बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट 20 अगस्त तक न्यायालय में प्रस्तुत करनी होगी।
लंबित मामलों का सबसे अधिक असर आम लोगों पर
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि पुलिस यदि किसी मामले में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर देती है, तब भी अंतिम आदेश न आने से संबंधित व्यक्ति लंबे समय तक कानूनी अनिश्चितता में फंसा रहता है। इससे उसे कई व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
याचिकाकर्ता ने बताया अपना मामला
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि उनके मामले में गोसाईंगंज थाने की पुलिस ने 11 जुलाई 2020 को ही फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। इसके बावजूद आज तक अदालत से अंतिम आदेश नहीं मिल सका।
उन्होंने यह भी कहा कि मामला लंबित होने के कारण उनके पासपोर्ट का नवीनीकरण नहीं हो पा रहा है, जबकि उन्हें विदेश यात्रा की आवश्यकता है। उनका कहना था कि लंबे समय तक मामला अधूरा रहने से उनके व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन पर भी असर पड़ रहा है।
20 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने सभी जिला जजों से मांगी गई रिपोर्ट 20 अगस्त तक प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब अगली सुनवाई में अदालत यह देखेगी कि प्रदेशभर की अदालतों में लंबित फाइनल रिपोर्टों की वास्तविक स्थिति क्या है और उन्हें समयबद्ध तरीके से निपटाने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।



















