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केवल संदिग्ध रकम पर ही रोक, पूरे बैंक खाते को फ्रीज करना उचित नहीं: लखनऊ पीठ

हाईकोर्ट ने जांच एजेंसियों को बताई सीमा; बैंक को FIR, रोक का आधार और लियन राशि की जानकारी देने के निर्देश, ग्राहकों की शिकायतों के लिए नोडल व्यवस्था भी जरूरी

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ

विधिक संवाददाता | शुभंकर भानु

लखनऊ, विधिक संवाददाता शुभंकर भानु: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बैंक खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी खाते में केवल एक निश्चित रकम संदिग्ध लेनदेन से जुड़ी है, तो जांच के नाम पर पूरे खाते के संचालन पर रोक नहीं लगाई जानी चाहिए। रोक संदिग्ध रकम तक सीमित और परिस्थितियों के अनुरूप होनी चाहिए।

न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह आदेश लखनऊ के एक व्यवसायी की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। मामले में करीब 36 हजार रुपये के एक लेनदेन को साइबर अपराध की जांच से जोड़कर खाते पर रोक लगाई गई थी। अदालत ने संबंधित बैंक को खाते में बाकी रकम के संचालन की अनुमति देने का निर्देश दिया, जबकि विवादित 36 हजार रुपये पर लियन बनाए रखने को कहा।

जांच के नाम पर पूरी वित्तीय गतिविधि रोकना उचित नहीं

अदालत ने माना कि साइबर अपराध की जांच के दौरान बैंक खाते पर कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन इसका इस्तेमाल इस तरह नहीं होना चाहिए कि खाताधारक की पूरी वित्तीय गतिविधि और वैध कारोबार प्रभावित हो जाए। यदि जांच में किसी खास रकम को संदिग्ध बताया गया है, तो कार्रवाई का दायरा भी सामान्य तौर पर उसी रकम तक सीमित रहना चाहिए।

इससे यह साफ होता है कि किसी खाते में संदिग्ध लेनदेन सामने आने मात्र से खाते में मौजूद हर रकम को अपराध से जुड़ा मानकर रोक देना उचित नहीं होगा।

जांच अधिकारी को बैंक को देनी होगी जरूरी जानकारी

हाईकोर्ट ने जांच अधिकारियों की जिम्मेदारी भी स्पष्ट की है। खाते पर रोक लगाने के लिए बैंक को FIR की जानकारी, खाते पर रोक लगाने का आधार और लियन के तहत रखी जाने वाली रकम के बारे में बताया जाना चाहिए। संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट को भी खाते पर लगाई गई रोक की सूचना देने की प्रक्रिया का पालन करना होगा।

बैंकों के लिए शिकायत निवारण व्यवस्था बनाने का निर्देश

अदालत ने अपने क्षेत्राधिकार में आने वाले बैंकों और वित्तीय संस्थानों को खातों के फ्रीज होने या डिजिटल बैंकिंग सेवाओं पर रोक से जुड़ी शिकायतों के लिए प्रभावी नोडल व्यवस्था तैयार करने का निर्देश भी दिया है। इसका उद्देश्य खाताधारकों को ऐसी स्थिति में शिकायत और समाधान का स्पष्ट रास्ता उपलब्ध कराना है।

साइबर अपराध की जांच पर नहीं लगेगी रोक

हाईकोर्ट के निर्देश का अर्थ यह नहीं है कि संदिग्ध लेनदेन की जांच बंद हो जाएगी। जांच एजेंसी अपनी जांच जारी रख सकती है और यदि आगे कोई अतिरिक्त आपत्तिजनक सामग्री सामने आती है तो कानून के मुताबिक कार्रवाई भी कर सकती है। अदालत का जोर इस बात पर है कि जांच की जरूरत और खाताधारक के वैध वित्तीय अधिकारों के बीच संतुलन बना रहे।

Also Read: राहुल गांधी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज, इलाहाबाद हाईकोर्ट के CBI-ED जांच आदेश को दी चुनौती

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