निजी सहायक चंदन सिंह जीना के ठिकाने से 32 लाख कैश, 200.5 ग्राम सोना और 12 लग्जरी घड़ियां मिलने का ED का दावा; 2016 UKSSSC भर्ती परीक्षा जांच से जुड़ा मामला

देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने अपने करीबी सहयोगी चंदन सिंह जीना के ठिकाने पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद कांग्रेस के संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है। रावत ने कहा कि वह नहीं चाहते कि उनके किसी करीबी से जुड़ा विवाद कांग्रेस की भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को कमजोर करे। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने उत्तराखंड कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी और कांग्रेस कार्यसमिति से जुड़ी अपनी जिम्मेदारियां छोड़ी हैं।
जीना के घर ED की तलाशी, नकदी और सोना बरामद होने का दावा
ED की कार्रवाई हरीश रावत के पूर्व OSD और वर्तमान निजी सहायक बताए जा रहे चंदन सिंह जीना के देहरादून स्थित आवास पर हुई। जांच एजेंसी के मुताबिक, तलाशी के दौरान 32 लाख रुपये की बेहिसाबी नकदी, करीब 200.5 ग्राम सोना और 12 लग्जरी घड़ियां मिलीं। बरामद सोने में 13 गोल्ड कॉइन और सात गोल्ड चेन शामिल होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा कुछ बैंक खातों में रखी करीब 52.16 लाख रुपये की राशि फ्रीज किए जाने की भी रिपोर्ट है।
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ED के मुताबिक, बरामद संपत्तियों की कुल कीमत करीब 1.28 करोड़ रुपये आंकी गई है। हालांकि, इन संपत्तियों के स्रोत और जांच में सामने आए आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच पूरी होने और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा।
2016 की VDO भर्ती परीक्षा से जुड़ी जांच
ED की यह कार्रवाई उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की वर्ष 2016 में हुई ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VDO) भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है।
जांच में परीक्षा की OMR उत्तर पुस्तिकाओं में कथित हेरफेर और निजी एजेंसी के जरिए परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितता के आरोपों की पड़ताल की जा रही है। ED इसी मामले से जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों की जांच कर रही है।
रावत ने कहा- आरोपों पर मुझे भरोसा नहीं
ED की कार्रवाई के बाद हरीश रावत ने चंदन सिंह जीना का बचाव भी किया है। उन्होंने आरोपों पर अविश्वास जताते हुए कहा कि वह अपने सहयोगी को जानते हैं और उन्हें लगाए गए आरोपों पर भरोसा नहीं है। रावत ने यह भी संकेत दिया कि कार्रवाई का राजनीतिक प्रभाव 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले पड़ सकता है।
रावत ने अपनी भूमिका को लेकर भी कहा कि यदि उनके कार्यकाल के दौरान किसी स्तर पर कोई गलती हुई हो तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने अपनी सरकार के दौरान बड़ी संख्या में भर्तियां होने का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने नियुक्तियों में पारदर्शिता बरतने की कोशिश की थी।
कांग्रेस के पद छोड़ने के पीछे क्या कहा रावत ने?
हरीश रावत का कहना है कि वह नहीं चाहते कि उनके किसी करीबी सहयोगी से जुड़ा विवाद कांग्रेस की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम पर सवाल खड़े करे। इसी वजह से उन्होंने पार्टी के संगठनात्मक पदों से हटने का फैसला लिया।
हालांकि, इसे कांग्रेस से पूरी तरह इस्तीफा देना नहीं कहा जा सकता। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार रावत ने पार्टी के पदों से इस्तीफा दिया है, जबकि वह कांग्रेस में बने हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि वह आगे चुनाव नहीं लड़ेंगे और पार्टी को मजबूत करने के लिए काम करेंगे।
जांच आगे बढ़ने के साथ बढ़ेगी राजनीतिक हलचल
ED की कार्रवाई ने उत्तराखंड की राजनीति में भी नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ जांच एजेंसी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही है, वहीं दूसरी ओर रावत ने कार्रवाई के राजनीतिक प्रभाव पर सवाल उठाए हैं।
फिलहाल चंदन सिंह जीना से जुड़े आरोपों और बरामद संपत्तियों के स्रोत को लेकर जांच जारी है। इसलिए बरामदगी को अंतिम तौर पर किसी अपराध का प्रमाण मानना उचित नहीं होगा। जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई से ही यह स्पष्ट होगा कि इन संपत्तियों का संबंध कथित भर्ती अनियमितताओं से है या नहीं।
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