MDA ने 300 वर्ग मीटर में बने निर्माण पर उठाए सवाल; 21 अगस्त को नोटिस, 3 सितंबर तक मांगा जवाब

मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बीच अब मुरादाबाद की मुस्तफा मस्जिद को लेकर भी प्रशासनिक कार्रवाई की चर्चा तेज हो गई है। दिल्ली-लखनऊ नेशनल हाईवे पर तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय (TMU) के पास स्थित मस्जिद को लेकर मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (MDA) ने नोटिस जारी किया है। प्राधिकरण ने मस्जिद प्रबंधन से निर्माण की स्वीकृति और स्वीकृत नक्शे से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं।
MDA के मुताबिक, यह निर्माण करीब 300 वर्ग मीटर क्षेत्र में है और निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्माण की स्वीकृति से संबंधित दस्तावेज मौके पर उपलब्ध नहीं कराए गए। प्राधिकरण ने इसे उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम, 1973 के तहत अनधिकृत निर्माण बताते हुए मस्जिद प्रबंधन से जवाब मांगा है।
21 अगस्त को जारी हुआ नोटिस
रिपोर्ट के अनुसार MDA के विहित अधिकारी की ओर से मस्जिद के प्रबंधक को 21 अगस्त 2026 को नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम की धारा 27 का उल्लेख किया गया है। इसी प्रक्रिया के तहत प्राधिकरण ने पूछा है कि कथित अनधिकृत निर्माण को हटाने या ध्वस्त करने का आदेश क्यों न जारी किया जाए।
नोटिस में यह भी कहा गया है कि संबंधित निर्माण के लिए अधिनियम की धारा 14 और 15 के तहत आवश्यक विकास प्राधिकरण की अनुमति प्राप्त नहीं की गई। मस्जिद प्रबंधन को अपना पक्ष रखने और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया था। जवाब देने की निर्धारित अंतिम तारीख 3 सितंबर 2026 थी।
मस्जिद कई दशक पुरानी होने का दावा
इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि स्थानीय स्तर पर मस्जिद को कई दशक पुराना बताया जा रहा है। वहीं MDA के नोटिस में कथित अनधिकृत निर्माण की शुरुआत की तारीख 20 अगस्त 2026 दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। यही विरोधाभास अब मामले को और संवेदनशील बना रहा है।
मस्जिद के इमाम हाफिज मुहम्मद शाने अजहरी ने मीडिया से कहा कि उन्हें नोटिस और निर्माण संबंधी दस्तावेजों के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं है और उनका काम केवल नमाज पढ़ाना है। इससे संकेत मिलता है कि निर्माण की स्वीकृति और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की स्थिति पर अंतिम तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है।
अभी बुलडोजर कार्रवाई नहीं हुई
मामले में यह अंतर समझना जरूरी है कि MDA का नोटिस ध्वस्तीकरण की अंतिम कार्रवाई नहीं है। नोटिस के जरिए प्रबंधन को अपना पक्ष रखने और दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों में फिलहाल मस्जिद को गिराए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।
इसलिए मौजूदा स्थिति को “ध्वस्तीकरण का नोटिस और संभावित कार्रवाई” के तौर पर देखना ज्यादा सटीक होगा, न कि मस्जिद पर बुलडोजर चलाने का अंतिम आदेश मानना।
सहारनपुर की कार्रवाई के बाद बढ़ी चर्चा
मुरादाबाद का मामला ऐसे समय सामने आया है जब सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को लेकर कार्रवाई हुई है। सहारनपुर में संबंधित मस्जिद को सरकारी जमीन पर अनधिकृत निर्माण मानते हुए जुलाई में बेदखली का आदेश दिया गया था और उसके खिलाफ अपील 2 सितंबर को खारिज होने के बाद 5 सितंबर को ढांचे को ध्वस्त किया गया। प्रशासन ने कार्रवाई को कानूनी प्रक्रिया के तहत बताया, जबकि मस्जिद प्रबंधन ने प्रक्रिया का पालन नहीं होने का आरोप लगाया है।
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