लखनऊ: राजधानी लखनऊ में वकीलों के भेष में कुछ लोगों द्वारा कथित तौर पर जबरन घुसपैठ, तोड़फोड़ और कब्जे की कोशिश के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने टिप्पणी करते हुए पूछा कि घटना के दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद होने के बावजूद उन्होंने कार्रवाई क्यों नहीं की और अतिरिक्त पुलिस बल क्यों नहीं बुलाया गया।

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान उपलब्ध वीडियो फुटेज और मामले से जुड़े दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि पहली नजर में ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिसकर्मी पूरे घटनाक्रम के दौरान निष्क्रिय बने रहे। अदालत ने यह भी कहा कि परिस्थितियों को देखते हुए स्थानीय पुलिस की भूमिका की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
हाईकोर्ट ने लखनऊ के पुलिस आयुक्त को मामले की जांच कर यह स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं कि घटना के समय मौजूद पुलिसकर्मियों ने क्या कदम उठाए, आरोपितों को तत्काल हिरासत में क्यों नहीं लिया गया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
मामला उस जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि वकील की पोशाक पहने कुछ लोग एक परिसर में घुस गए, कर्मचारियों और मजदूरों के साथ मारपीट की, तोड़फोड़ की, सीसीटीवी कैमरे क्षतिग्रस्त किए और परिसर पर कब्जा करने का प्रयास किया। इस संबंध में पहले से एफआईआर दर्ज है और कई अधिवक्ताओं के नाम भी सामने आए हैं।
अदालत ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर बताते हुए कहा कि यदि कानून के जानकार ही कानून को अपने हाथ में लेते हैं, तो इससे न्याय व्यवस्था और वकालत जैसे सम्मानित पेशे की छवि प्रभावित होती है। कोर्ट ने मामले में सुरक्षित रखे गए वीडियो साक्ष्यों के संरक्षण के भी निर्देश दिए हैं तथा याचिकाकर्ता की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और हाईकोर्ट ने पुलिस की भूमिका पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आने वाली सुनवाई में इस प्रकरण पर आगे की कार्रवाई और जांच की प्रगति पर अदालत की नजर रहेगी।
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