
नई दिल्ली। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान की कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में 17 अगस्त को सुनवाई होगी। कोर्ट के समक्ष दाखिल याचिकाओं में मामले की जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट की ओर से किए जाने की मांग की गई है।
मामले में इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित विशेष जांच दल (SIT) की जांच को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे। कोर्ट ने जांच में फॉरेंसिक ऑडिट के विशेषज्ञ को शामिल करने को कहा था, ताकि कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच में वित्तीय रिकॉर्ड और लेनदेन की भी गहराई से पड़ताल हो सके।
17 अगस्त की सुनवाई पर नजर
सुप्रीम कोर्ट ने 10 अगस्त को मामले की सुनवाई टालते हुए अगली तारीख 17 अगस्त तय की थी। इससे पहले 27 जुलाई को कोर्ट ने अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन की जांच के लिए गठित SIT का संज्ञान लिया था और इसमें फॉरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने का निर्देश दिया था।
याचिकाओं में कथित वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। कुछ याचिकाकर्ताओं ने SIT के बजाय CBI जैसी केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने और ट्रस्ट के वित्तीय मामलों के ऑडिट की मांग भी उठाई है।
SIT कर रही है मामले की जांच
उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए IGP किरण एस की अगुवाई में SIT गठित की है। सुप्रीम कोर्ट ने जांच को अधिक व्यापक और पारदर्शी बनाने के लिए इसमें फॉरेंसिक ऑडिट विशेषज्ञ को शामिल करने की बात कही थी। कोर्ट ने जांच की प्रगति से संबंधित रिपोर्ट भी मांगी है।
मामला सामने आने के बाद मंदिर में चढ़ावे और दान के प्रबंधन को लेकर कई सवाल उठे हैं। हालांकि, इन आरोपों से जुड़े तथ्यों और जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता और बड़े पैमाने पर जुड़े सार्वजनिक हित को देखते हुए जांच स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं में कोर्ट की निगरानी में SIT जांच की मांग इसी संदर्भ में की गई है।
17 अगस्त की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट जांच की प्रगति, SIT की भूमिका और आगे की कार्रवाई से जुड़े पहलुओं पर विचार कर सकता है।
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